नमस्कार जयपुर में पीसीसी चीफ ने सरकार को खुली चुनौती दे डाली। कहा-हिम्मत है तो 10 साल में हुए पेपरलीक की सीबीआई जांच कराओ। कोटा में श्रीराम कथा में शिक्षा मंत्रीजी के 5 साल के पोते ने मंच से हनुमान चालीसा सुनाई। कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने एक महिला से कहा कि मंच पर कतई नहीं बुलाऊंगा और जोधपुर में ब्लास्ट के बाद भी टंकी नहीं ढही। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. PCC चीफ का खुला चैलेंज सभाओं में गमछा हिलाकर डांस करने वाले नेताजी के तेवर तीखे नजर आ रहे थे। सम्मेलन था पंचायती राज सशक्तिकरण का। लेकिन भाषण चुनावी सा हो गया। बड़े नेता मंच पर थे, चीफ साहब डायस पर। बात पेपरलीक की निकली तो तर्जनी उठाकर बोले- आज वो कहते हैं कि ओएमआर शीट फर्जी है, बेईमानी हुई। मान लिया। अगर हिम्मत है तो 10-12 साल के तमाम पेपरों की सीबीआई जांच कराओ। पता लग जाएगा। सभागार में तालियां गूंज गई। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रभारी जी पधारे थे। एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी के लिए चीफ साहब भी पहुंचे। उनके साथ एक ऐसे नेता भी थे जिन्हें पेपरलीक मामले में ईडी ने पकड़ा था। 8-8 घंटे पूछताछ हुई थी। रेड पड़ी थी। गणपति प्लाजा में लॉकर पकड़ने के दावे हुए थे। जोश में सत्ताधारी पार्टी संगठन के एक नेताजी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी। कहा- पेपरलीक वालों पर चीफ साहब की विशेष मेहरबानी है। इसके बाद कमेंट करने वालों की बौछार आ गई। एक यूजर ने लिखा- ईडी के हाथ कुछ नहीं लगा था। क्लीन चिट के बाद इनकी फाइल बंद कर दी गई थी। 2. मंत्रीजी के पोते ने सुनाई हनुमान चालीसा कहते हैं मूल से प्यारा ब्याज होता है और बेटे से प्यारा पोता। शिक्षा मंत्रीजी ने भी पोते के गुणों का खूब बखान किया। पोता है भी काबिल। कोटा में श्रीराम कथा हुई। बड़े बड़े साधु संन्यासी पहुंचे। बड़े बड़े कथावाचक पहुंचे। मंच पर शिक्षा मंत्रीजी थे। कुछ देर में मंच पर 5 साल का बच्चा नजर आया। पीला कुर्ता पहने बच्चे के हाथ में शिक्षा मंत्रीजी ने माइक थमाया और हनुमान चालीसा सुनाने को कहा। इतने छोटे बच्चे ने बिना रुके पूरी हनुमान चालीसा सुना दी। दादा भीतर ही भीतर गदगद। राम को पूजने वाली पार्टी के नेताजी का पोता हनुमान भक्त। इससे बढ़िया क्या बात होगी। पूत के पैर पालने में दिखते हैं। कार्यक्रम के बाद दादाजी ने पोतेजी का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और लिखा- जब यह देखता हूं कि मेरे परिवार की नई पीढ़ी सनातन संस्कृति के रास्ते पर बढ़ रही है तो मन आस्था से भर जाता है। नन्हे पोते को हनुमान चालीसा सुनना केवल उपलब्धि नहीं, संस्कारों की जीत है। मंत्रीजी ने लोगों से आग्रह भी कर दिया- अपने बच्चों को संस्कृति, मर्यादा, भक्ति और संस्कारों से जोड़ें। 3. धीरेंद्र शास्त्री बोले-मंच पर नहीं बुलाऊंगा कोटा में युवा कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की राम कथा हुई। कथा में देशभर से जनसैलाब उमड़ा। कथा के दौरान एक महिला मंच पर आने की जिद करने लगी। धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से ही संवाद किया। कहा- हमने क्या तुम्हारा कर्जा ले रखा है? क्या कर लोगी? नहीं बुलाएंगे। महिला मुंह बिगाड़ने लगे। आंखें दिखाने लगी। परेशान होने लगी। कथावाचक उसे चिढ़ाने लगे। बोले- थारो कर्जो ले रखा है क्या? महिला गुस्से में बड़बड़ाने लगी। धीरेंद्र शास्त्री का हंसी-विनोद जारी रहा। बोले- गाली क्यों दे रहीं अम्मा, तुम्हारे लिए नहीं आए हैं, पूरे गांव के लिए आए हैं। महिला के हाव-भाव और तीखे हो गए। धीरेंद्र शास्त्री ने सिर पकड़ लिया, हंसते हुए बोले-अरे हम माथा पटक लें अपना, गाली मत दे माता, श्राप मत दे। हे भगवान हम राजस्थान में आकर फंस गए। आजा माता आजा। 4. चलते-चलते… टंकी पता नहीं किसके कार्यकाल में बनी थी। लेकिन दशकों तक इसने पूरे गांव को पानी पिलाया। जर्जर होने के बाद आदेश आया कि टंकी गिरा दी जाए। नई टंकी पास ही खड़ी थी। पुरानी टंकी को ब्लास्ट से गिराए जाने के लिए टीम पहुंच गई। माप-जोख लिया गया। ब्लास्ट का समय तय किया गया। गांव को अलर्ट कर दिया गया। टीम ने टंकी के पिलरों के पास बारूद लगाया और इशारे के साथ ही जोरदार धमाका हुआ। टंकी धमाके के साथ करीब 10 फीट धंस कर छोटी हो गई लेकिन गिरी नहीं। टीम भी सकते में। ये क्या हुआ? डरते-सहमते काफी देर में पास गए। ब्लास्ट के बाद भी टंकी सीधी खड़ी थी। बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में। जैसे गोली लगने के बाद भी मिथुन दादा मरते नहीं थे। टंकी स्टार बन गई। लोग इस घटना को राजनीति से जोड़ने लगे। एक विचारधारा के लोग बोले- टंकी हमारी वाली पार्टी के टाइम में बनी थी, देख लो असली मजबूती। (इनपुट सहयोग- मुकेश सोनी (कोटा)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
