मुकाबले से पहले घबराहट होती है, लेकिन भारत के लिए तिरंगा ओढ़कर गोल्ड जीतने का सपना मुझे हिम्मत देता है… चित्तौड़गढ़ के 12 वर्षीय एकांश अगनानी ने यह बात इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद कही। पांच साल की उम्र में सेल्फ डिफेंस सीखने की जिद से कराटे शुरू करने वाले एकांश ने पहले नेशनल में मिली हार के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। रोज 2 से 3 घंटे अभ्यास और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने कोलकाता में आयोजित 10वीं इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप इंडियन चैलेंजर कप-2026 में नेपाल के खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल जीता। अब उनका अगला लक्ष्य विदेश में भारत के लिए गोल्ड जीतना है। पांच साल की उम्र से शुरू कर दी थी तैयारी एकांश को बचपन से ही सेल्फ डिफेंस सीखने का शौक था। सिर्फ पांच साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता मुकेश अगनानी और मां याशिका अगनानी से कराटे सीखने की इच्छा जताई। उनका मानना था कि मुश्किल समय में सबसे ज्यादा अपनी ताकत और आत्मविश्वास काम आता है। इसके बाद उन्होंने कराटे एकेडमी में एडमिशन लिया। शुरुआत खेल-खेल में हुई, लेकिन धीरे-धीरे कराटे उनके जीवन का हिस्सा बन गया। कोच मोहित वैष्णव ने शुरुआत में ही एकांश की सीखने की क्षमता पहचान ली। उनका कहना है कि एकांश को कोई भी नई तकनीक एक बार समझा दी जाए तो वह उसे तुरंत सीख लेता है और हर बार पहले से बेहतर प्रदर्शन करता है। एकेडमी में उसे सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि मुकाबले के दौरान शांत रहना और पूरे फोकस के साथ खेलना भी सिखाया गया। पहले नेशनल में हार, फिर लगातार जीत का सिलसिला एकांश ने पहले जिला और फिर राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। नौ साल की उम्र में पहली बार नेशनल चैंपियनशिप खेली, लेकिन कोई मेडल नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी। अगले साल नेशनल में ब्रॉन्ज और फिर उसके अगले साल गोल्ड मेडल जीत लिया। जनवरी में रांची में भी गोल्ड जीता और अब कोलकाता में इंटरनेशनल गोल्ड अपने नाम कर लिया। मुकाबले से पहले घबराहट, फिर सपना देता है हिम्मत एकांश बताते हैं कि मुकाबले से पहले नाम पुकारे जाने पर कुछ पल के लिए घबराहट होती है। ऐसे समय वह अपना बचपन का सपना याद करते हैं कि एक दिन भारत का तिरंगा कंधों पर रखकर देश के लिए गोल्ड जीतना है। यही सोच उन्हें आत्मविश्वास देती है। सेल्फ डिफेंस हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, क्योंकि मुश्किल समय में कई बार मोबाइल या कोई दूसरा सहारा भी काम नहीं आता। पढ़ाई और कराटे दोनों को साथ रखा एकांश रोज दो से तीन घंटे कराटे का अभ्यास करते हैं और पढ़ाई के लिए भी अलग समय निकालते हैं। उनका कहना है कि अनुशासन के साथ खेल और पढ़ाई दोनों में अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है। उनके अनुसार सफलता का सबसे बड़ा मंत्र समय का सही उपयोग और नियमित मेहनत है। अब विदेश में भारत के लिए गोल्ड जीतने का लक्ष्य इंटरनेशनल गोल्ड जीतने के बाद भी एकांश का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। अब वह जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं से आगे बढ़ते हुए दूसरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना चाहते हैं। उनका सपना विदेश में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। कोच मोहित वैष्णव ने बताया कि दिसंबर में पुडुचेरी में होने वाली प्रतियोगिता के बाद उन्हें विदेश की प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार किया जाएगा। पांच साल में बनाया शानदार रिकॉर्ड कम उम्र में ही एकांश ने 10 गोल्ड, 1 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल जीत लिए हैं। इनमें एक इंटरनेशनल गोल्ड, दो नेशनल गोल्ड, एक नेशनल ब्रॉन्ज, तीन स्टेट गोल्ड, एक स्टेट सिल्वर, तीन स्टेट ब्रॉन्ज, चार जिला गोल्ड और एक जिला ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने येलो, ऑरेंज, ग्रीन, ब्राउन और ब्लैक बेल्ट भी हासिल कर ली है। हर साल बढ़ती गई उपलब्धियां साल 2021 में जिला कप का पहला गोल्ड जीतने से शुरू हुआ सफर लगातार आगे बढ़ता गया। 2022 और 2024 में जिला, राज्य और नेशनल स्तर पर कई मेडल जीते। 2025 में भी गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज अपने नाम किए। आखिरकार 2026 में कोलकाता इंटरनेशनल चैंपियंस कप में गोल्ड जीतकर करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस प्रतियोगिता में चित्तौड़गढ़ के अन्य खिलाड़ियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा एकांश के इंटरनेशनल गोल्ड की रही। — संबंधित ये खबर भी पढ़ें … पिता ने जमीन बेचकर तीन बेटियों को रेसलर बनाया:बड़ी बेटी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता सिल्वर मेडल; बचपन में लड़कों से लड़ती थी कुश्ती मैं जब 8 साल की थी तो पापा ने कोच के पास रेसलिंग सीखने भेज दिया। वहां कोच लड़कों से रेसलिंग करवाते थे। जब लड़कों से जीतने लगी तो कुश्ती लड़ने में कॉन्फिडेंस आने लगा। पूरी खबर पढ़िए
