वैदिक मंत्रों की गूंज, शंखनाद, ढोल-नगाड़ों की थाप और “जय जगन्नाथ” के जयघोष के बीच रविवार सुबह ऋषि घाटी स्थित ऐतिहासिक जगदीश मंदिर भक्तिमय माहौल में डूब गया। देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का पारंपरिक महास्नान महोत्सव मनाया गया, जिसमें सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। जैसे ही ठाकुर जी को गर्भगृह से स्नान मंडप तक लाया गया, पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान को निज मंदिर से स्नान स्थल पर विराजित किया गया। इसके बाद 108 चांदी के कलशों से महाप्रभु का दिव्य अभिषेक किया गया। अभिषेक के लिए तैयार किए गए पवित्र जल में पुष्कर सरोवर का जल, गंगाजल, गुलाब जल, विभिन्न सुगंधित द्रव्य और मौसमी फलों के रस मिलाए गए। श्रद्धालुओं ने महास्नान के दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद लिया। आयोजन से जुड़े राकेश डीडवानिया ने बताया कि यह परंपरा जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर निभाई जाती है। पुरी में जहां 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक होता है, वहीं अजमेर में वर्षों से 108 चांदी के कलशों से महास्नान कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्री अग्रवाल पंचायत मारवाड़ी धड़ा पिछले करीब एक शताब्दी से इस परंपरा का निर्वहन कर रहा है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा भगवान जगन्नाथ का ‘प्रकट दिवस’ भी माना जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन मंदिर के पट पहली बार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। तभी से भगवान जिस स्वरूप में प्रकट हुए थे, आज भी उसी भाव और परंपरा के साथ उनकी सेवा-पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस महास्नान के दर्शन और सेवा से शारीरिक कष्टों एवं रोगों से मुक्ति मिलती है। महास्नान के साथ ही अब शहर की बहुप्रतीक्षित जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। समिति के अध्यक्ष संजय कन्दोई ने बताया कि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। इसके बाद भगवान सात दिनों तक जनकपुरी में भक्तों को दर्शन देंगे और 24 जुलाई को पुनरागमन रथ यात्रा के साथ महोत्सव का समापन होगा।
