राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने रिटायरमेंट से ठीक पहले शिक्षिका के खिलाफ निकाली गई वेतन रिकवरी पर रोक लगा दी। जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने यह आदेश शिक्षिका दलजीत कौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया था कि साल 1993 में शिक्षिका पद पर नियुक्ति हुई थी। करीब 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद उसे साल 2013 में नियमित करते हुए वेतन फिक्सेशन किया गया था। अब वह रिटायर होने वाली है तो शिक्षा विभाग ने उसके फिक्सेशन को गलत मानते हुए 12 साल की वार्षिक वेतन वृद्धि रद्द करते हुए उसके खिलाफ रिकवरी निकाल दी। जबकि उसका फिक्सेशन नियमों के तहत ही किया गया था। उसे सुनवाई का मौका दिए बिना उसके खिलाफ रिकवरी के आदेश निकाल दिए गए। सरकार ने आदेश वापस लिया, रिकवरी निकाली याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नगेंद्र शर्मा ने बताया- साल 2002 में सरकार ने आदेश निकाला था कि जिस शिक्षक को सेवा में 10 साल हो गए हैं, उसे प्रशिक्षित मानकर उसे नियमित करते हुए उसके वेतन का फिक्सेशन किया जाए। इसके कारण याचिकाकर्ता को साल 2013 में नियमित करते हुए फिक्सेशन का लाभ दिया गया। बाद में सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया। ऐसे में अब जब शिक्षका रिटायर होने वाली है तो विभाग ने साल 2013 से अब तक उन्हें मिली वार्षिक वेतन वृद्धियों को रद्द कर दिया। उन्हें दिए गए वेतन की रिकवरी निकाल दी। इसे हमने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने हमारे पक्ष को जानने के बाद शिक्षिका को अंतरिम राहत देते हुए वेतन रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी।
