सलूम्बर में बुधवार को पंचायत समिति सभागार में जिला स्तरीय नारी चौपाल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और आत्मनिर्भरता के अवसरों से जोड़ना था। जिला प्रशासन, महिला अधिकारिता विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिलेभर से साथिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों, राजीविका समूहों की महिलाओं और ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का आह्लान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने महिलाओं से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। बालिका शिक्षा पर दिया जोर जिला शिक्षा अधिकारी माया बजाज ने महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षित बेटी ही सशक्त समाज की आधारशिला है। बजाज ने महिलाओं को उनके संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों की भी जानकारी दी। महिलाओं को किया जागरूक महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक राजेश शर्मा और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की प्रतिनिधि ममता जाखड़ ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। ममता जाखड़ ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और पालनहार योजना के लाभ तथा पात्रता संबंधी जानकारी देकर महिलाओं को जागरूक किया। महिला अधिकारिता विभाग ने लाड़ो प्रोत्साहन योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर और सामूहिक विवाह अनुदान योजना सहित महिलाओं के हित में संचालित अन्य योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के डॉ. नितिन जैन ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण और एएनसी जांच के महत्व पर प्रकाश डाला। पुलिस विभाग की जानकारी दी पुलिस विभाग के एएसआई बहादुर लाल ने महिलाओं की सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों और पुलिस विभाग की महिला हितैषी सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को जागरूक रहने का संदेश भी दिया। कृषि विभाग के प्रतिनिधि देवी लाल ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के लिए उपलब्ध योजनाओं और आर्थिक सहायता कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। नारी चौपाल के दौरान आजीविका ब्यूरो, बेसिक हेल्थ केयर सर्विसेज, किलकारी मोबाइल एकेडमी और गायत्री सेवा संस्थान सहित विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने भी अपनी गतिविधियों और सेवाओं का परिचय दिया। उन्होंने महिलाओं को उपलब्ध सहायता संसाधनों से अवगत कराया।