भास्कर न्यूज | जालंधर अदालत ने करीब 8 साल पहले बिल्डर से 20 हजार रुपए रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े गए जेई सतपाल को बरी किया है। विजिलेंस आरोप साबित नहीं कर पाई। इस मामले में विजिलेंस ने 13 फरवरी 2018 को दावा किया था कि बिल्डर गुरसाहिब सिंह वासी पारस एस्टेट से आदर्श नगर चौक के पास स्थित बिजली घर में तैनात पावरकॉम के जूनियर इंजीनियर (जेई) सतपाल को 20 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस मामले में बचाव पक्ष ने अपने तर्क रखे और बताया कि उनके क्लाइंट को फंसाया गया है। दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। बिल्डर ने आरोप लगाया था कि जेई उनके दफ्तर के बाहर लगे टूटे खंॉभे के बदलने के एवज में पैसे ले रहा था। जेई ने ही उसे 10 फरवरी को अपने हाथ से शिकायत तक लिख कर दी थी। विजिलेंस ने कहा था कि जब जेई को पकड़ा तो गिरने से उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। विजिलेंस ने जांच पूरी कर चार्जशीट कोर्ट में फाइल कर दी थी, लेकिन आरोप साबित नहीं कर पाई। बचाव पक्ष के एडवोकेट दर्शन सिंह दयाल ने कोर्ट में दलील दी कि उनके क्लांइट को फंसाया गया है, क्योंकि जहां खंभा लगा था, वह एरिया उनके क्लांइट की हद में नहीं आता। खंभा बदलने की पॉवर तो एक्सईएन के पास है। उनके क्लांइट से पैसे मिले नहीं थे। विजिलेंस ने क्लांइट का बायां हाथ तोड़कर दाएं हाथ में पाउडर लगाया। मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में पेश करके बताया कि दो ऑपरेशन के बाद हाथ ठीक हो सका। बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह कैसे संभव है कि जिस काम की सरकारी फीस 25 हजार है तो कोई 20 हजार में कर सकता है। खुद बिल्डर ने 25 हजार की फीस बाद में भरकर खंभा बदलवाया है। बचाव पक्ष ने कहा कि यह भी झूठ है कि उनके क्लांइट ने खंभा बदलने को लेकर शिकायत अपने हाथ से लिख कर दी थी, क्यो‌ंकि हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की रिपोर्ट के अनुसार उनके क्लांइट से शिकायत वाली हैंडराइटिंग मैच नहीं करती। दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने जेई को बरी कर दिया।

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