जोधपुर में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने एक प्राइवेट स्कूल के बच्चों से अपने दम पर पहचान बनाने और संघर्ष करने की बात कही। राजे ने कहा- पद मिलने का इंतजार करने के बजाय बाहर निकलकर संघर्ष करना चाहिए और अपनी खुद की जगह बनानी चाहिए। राजे ने बच्चों को आगे बढ़ने, अवसरों का इंतजार करने के बजाय उन्हें हासिल करने और अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया। राजे ने कहा- हमें तो कोई पद नहीं मिला। कोई छोटा सा पद ही दिलवा दीजिए। बिना पद के क्या करेंगे। पद के लिए इंतजार मत करो। बाहर निकलो और संघर्ष करो। उन्होंने कहा- अमृता देवी का कोई ऑफिस नहीं था। नंदकिशोर चौधरी ने 2 कमरों से अपना काम शुरू किया। उन्होंने समस्या देखी और उसके लिए लड़ने निकल गए। छोटा सा पद, एक छोटा सा पद इसके लिए मत सोचिए। दरअसल, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे शहर के एक निजी स्कूल में मॉडल यूनाइटेड नेशनल कार्यक्रम में पहुंचीं थीं। कार्यक्रम में वोटिंग के अधिकार को 16 साल करने और क्लाइमेंट चेंज को लेकर डिबेट भी हुई। पूर्व सीएम ने बच्चों की जमकर तारीफ की। अपनी खुद की जगह बनाइए, साहसी बनो और लीडरशिप करो पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा- आगे बढ़िए आपके लिए सोशल सर्विस करने की बहुत जगह है। गांव है, ढाणियां है, वहां जाइए। आप देश के भविष्य हैं। कोई साइंटिस्ट बनेगा, कोई इंजीनियर तो कोई लॉयर या फिर कोई लीडर बनेगा। एक और चीज- अपनी जगह बनाइए। मुझे भी किसी और की जगह बैठना पसंद नहीं है। वो जगह बनाओ, जहां आपको बैठना पसंद है। किसी की परमिशन का इंतजार मत करो, अपनी डिग्निटी बनाओ। साहसी बनो लीडरशिप करो, पीछे नहीं हटना है। उन्होंने कहा- मैंने कई लोगों के लिए जगह बनाई है। मैं अकेली महिला थी। मैंने उनके भविष्य के लिए जगह बनाई। उन लोगों ने उस जगह को अपना समझ लिया। हमने पहली सरकारी स्किल यूनिवर्सिटी की तैयार पूर्व सीएम ने बच्चों को उदाहरण देते हुए बताया- हमने लेबर डिपार्टमेंट को स्किल डिपार्टमेंट किया। एक अधिकारी ने मुझसे कहा कि आप ऐसा क्यों करना चाहती हैं। इसके बावजूद हमने स्किल्स डिपार्टमेंट शुरू किया। राजे ने कहा- कई साल बाद अधिकारी फिर से मुझसे मिले और इसके जरिए हमने 0 से 4 करोड़ और 4 से 60 करोड़ बनाए। मैंने पहली सरकारी स्किल यूनिवर्सिटी तैयार की। वो जब भी मिलते हैं तो कहते हैं कि ये निर्णय हमारा सबसे सही था। मीडिया को हमने चौथा स्तंभ कहा। यहां मेरे कई साथी मौजूद हैं। प्लीज अपनी आवाज को हमेशा मुखर रखें, जब कहीं गलत हो रहा हो और वो समस्याएं लोगों को जाननी जरूरी हो। रेगिस्तान में फूल खिलाने का हुनर हमें अच्छे से आता है वसुंधरा राजे ने कहा- रेगिस्तान में फूल खिलाने का हुनर हमें अच्छे से आता है। हम इसमें माहिर हैं। आसमान हमारी सीमाओं का अंत नहीं है। सदियों तक राजस्थान की जिस तेज धूप को चुनौती माना जाता था, आज उसी धूप से जोधपुर के पास भड़ला में हजारों मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। हम राजस्थानियों की मजबूती भी यही है। अपनी सबसे बड़ी चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल देना। उन्होंने कहा- एक मधुमक्खी अपने पूरे जीवन में एक चम्मच के बारहवें हिस्से जितना शहद बनाती है। उसका योगदान बहुत छोटा लगता है, लेकिन हजारों मधुमक्खियां मिलकर असंख्य छेदों वाला ऐसा छत्ता बनाती हैं, जिसकी संरचना का गणितीय प्रमाण जुटाने में वैज्ञानिकों को 2 हजार वर्ष लग गए। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बड़ा काम कर देते हैं। राजे ने कहा- सीएम के रूप में मैंने सीखा कि अच्छी नीति वह नहीं है, जो लोगों की मदद करे। अच्छी नीति वह है, जो लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करें। हमने बेटियों को साइकिलें इसलिए दीं, ताकि स्कूल की लंबी दूरी उनकी शिक्षा में बाधा न बने। भामाशाह योजना के माध्यम से महिलाओं को परिवार की मुखिया बनाया। उनके नाम से बैंक खाते खुलवाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खाते में पहुंच सके। फिक्की और सीआईआई में महिलाओं को देखने पर गर्व होता है वसुंधरा राजे ने कहा- मुझे गर्व महसूस होता है, जब मैं महिलाओं को फिक्की और सीआईआई में देखती हूं। मुझे बहुत गर्व फील होता है कि स्मॉल इंडस्ट्री हो या कोई भी फील्ड हो। जब मैं महिलाओं को कंसल्ट करते हुए देखती हूं तो लगता है ये महिलाएं देश को गौरवान्वित कर रही हैं। WHO ने भी ऐसी महिलाओं की सराहना की है। इसके बारे में ज्यादा नहीं बात करूंगी ये एक बड़ी डिबेट का विषय है। उसी की तरह हमारी आशा सहयोगिनियां काम कर रही हैं। छोटी जगह से आना आपके ड्रीम को छोटा नहीं करेगा उन्होंने कहा- हमें बिल गेट्स की जरूरत नहीं है। झालावाड़ में आशा सहयोगिनियों ने अच्छा काम किया है। हमारे पास पहले से WHO की तरह के प्रोग्राम हैं। छोटी जगह से आना आपके ड्रीम छोटे नहीं कर देता। आप किसी कस्बे से आए हैं तो इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि आपके सपने छोटे होंगे। बच्चों को अमृता देवी, पिपलांत्री गांव और बीकानेरी भुजिया के बारे में बताया वसुंधरा राजे ने बच्चों को बीकानेरी भुजिया, पिपलांत्री और अमृता देवी बिश्नोई के बारे में बताया। उन्होंने कहा- बीकानेर से निकले परिवार ने भुजिया को दुनिया भर में पहुंचाया। लोग आज भी यहां से विदेश जाते हैं, तो भुजिया साथ लेकर जाते हैं। जयपुर रग्स की भी ऐसी ही कहानी है। नंदकिशोर चौधरी ने इसे शुरू किया। होता ये है कि आज लोग कहते हैं कि हमारे त्योहार हैं, हमें छुट्टियां चाहिए। उन्होंने बुनाई करने वालों से कहा कि आप एक काम करो, मेरा कपड़ा ले जाओ और जहां घर हो वहां से बना कर ले आओ। उन्होंने खेजड़ी को लेकर कहा- बिश्नोई समाज से आने वाली अमृता देवी ने खेजड़ी को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। गांव ही है जो हमेशा पर्यावरण के संरक्षण में अपना योगदान निभाते हैं। राजसमंद में पिपलांत्री एक ऐसा गांव है, जहां बेटियां होती हैं, तो वो पेड़ लगाते हैं।
