जयपुर में विदेशी मॉडल्स ने फैशन के साथ पर्यावरण संरक्षण और देशभक्ति का संदेश भी दिया। रूस की मॉडल ने राष्ट्रीय ध्वज दिवस सेलिब्रेट किया, जबकि यूके की मॉडल ने रिसाइकल किए गए सामान से ड्रेस तैयार कर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। मॉडल्स का यह अंदाज फैशन और सामाजिक सरोकारों के अनूठे मेल के रूप में नजर आया। मानसरोवर स्थित अनंत महल में आयोजित इंटरनेशनल ब्यूटी पेजेंट ‘मिस ओशियन वर्ल्ड’ के ग्रैंड फिनाले में ग्लैमर के साथ दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं की खूबसूरत झलक देखने को मिली। 9 दिन चले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में विभिन्न देशों से आई ब्यूटी क्वीन ने अपने कल्चर, हेरिटेज और ट्रेडिशन को मंच पर प्रस्तुत किया। खास आकर्षण नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने देश की पहचान से जुड़े परिधानों के जरिए अपनी संस्कृति, इतिहास, प्रकृति और सामाजिक सरोकारों को दुनिया के सामने रखा। इस राउंड में पारंपरिक परिधानों के साथ कई प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण और समुद्र को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश भी दिया। खासतौर पर यूनाइटेड किंगडम की प्रतिभागी ने समुद्री शैवाल की खेती और रूस की प्रतिभागी ने ब्लैक सी में ऑयल स्पिल से प्रभावित जीव-जंतुओं को बचाने वाले वॉलंटियर्स को अपने कॉस्ट्यूम की थीम बनाया। इवेंट की यहां देखें PHOTO’S… एसवातिनी:राष्ट्रीय पक्षी की लाल पंखुड़ियों से शाही विरासत का प्रदर्शन एसवातिनी की प्रतिभागी ने अपने नेशनल कॉस्ट्यूम में देश के राष्ट्रीय पक्षी लिग्वालाग्वाला को प्रमुखता दी। इस पक्षी के शानदार लाल पंख एसवातिनी की संस्कृति और शाही विरासत से जुड़े माने जाते हैं। कॉस्ट्यूम का क्राउन भी इन्हीं लाल पंखों से प्रेरित रहा। पारंपरिक परिधान में एसवातिनी की महिला की पहचान को गौरव, अपनी जड़ों से जुड़ाव और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान के रूप में दिखाया गया। ज्वेलरी में भी पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई गई। प्रतिभागी ने अपने कॉस्ट्यूम के माध्यम से संदेश दिया कि यह सिर्फ एक पहनावा नहीं, बल्कि एक छोटे से साम्राज्य की मजबूत सांस्कृतिक पहचान है। भारत:साड़ी में सदियों की विरासत, छतरी में रंगों की कहानी भारत की प्रतिभागी ने साड़ी के जरिए भारतीय नारी की गरिमा, शक्ति और शालीनता को प्रस्तुत किया। उनके कॉस्ट्यूम में पारंपरिक भारतीय साड़ी के साथ खूबसूरती से कढ़ाई की गई छतरी खास आकर्षण रही। छतरी में भारत के विभिन्न रंगों और कला परंपराओं की झलक देखने को मिली। कॉस्ट्यूम का हर हिस्सा भारतीय कारीगरों के हाथों की कला और मेहनत को समर्पित रहा। प्रस्तुति में भारतीय महिला को ऐसी महिला के रूप में दिखाया गया, जो अपनी परंपराओं से गहराई से जुड़ी होने के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखती है। कॉस्ट्यूम के जरिए भारत की ‘विविधता में एकता’ की भावना हिमालय से लेकर समुद्र तक और प्राचीन परंपराओं से लेकर आधुनिक सपनों तक के रूप में नजर आई। इंडोनेशिया:जावा की पारंपरिक ‘केबाया’ में राजसी अंदाज इंडोनेशिया की प्रतिभागी ने जावा की पारंपरिक ब्राइडल और प्रिंसेस ड्रेस ‘केबाया’ को नेशनल कॉस्ट्यूम के रूप में प्रस्तुत किया। केबाया अपनी नाजुक सिल्हूट, बारीक कढ़ाई और बेहद खूबसूरत डिटेलिंग के लिए जानी जाती है। इस परिधान के माध्यम से इंडोनेशियाई संस्कृति की शालीनता और पारंपरिक शिल्पकला को प्रदर्शित किया गया। कॉस्ट्यूम ने यह बताया कि केबाया महज एक ड्रेस नहीं, बल्कि इंडोनेशिया की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपरा का हिस्सा है। जापान:युकाता में चेरी ब्लॉसम और राष्ट्रीय पहचान जापान की प्रतिभागी ने पारंपरिक जापानी गर्मियों के परिधान ‘युकाता’ को अपने नेशनल कॉस्ट्यूम का आधार बनाया। इसमें चेरी ब्लॉसम यानी सकुरा के फूलों का पैटर्न प्रमुख रहा, जो जापानी संस्कृति के सबसे लोकप्रिय प्रतीकों में से एक है। कॉस्ट्यूम में लाल और सफेद रंग की बेल्ट का इस्तेमाल किया गया, जो जापान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का प्रतिनिधित्व करती है। इस परिधान की खासियत सिर्फ इसकी खूबसूरती नहीं रही, बल्कि इसमें जापानी संस्कृति के टिकाऊपन का संदेश भी शामिल था। पारंपरिक परिधानों को संरक्षित कर उन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाना जापानी सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केन्या:समुद्र, स्वाहिली संस्कृति और तटीय विरासत केन्या की प्रतिभागी का नेशनल कॉस्ट्यूम देश की खूबसूरत तटीय विरासत और स्वाहिली संस्कृति से प्रेरित रहा। इसमें पारंपरिक फैब्रिक, बारीक बीडवर्क, प्राकृतिक सीपियों और लेदर का इस्तेमाल किया गया। कॉस्ट्यूम में इस्तेमाल सीपियां केन्या के समुद्र और उन तटीय समुदायों का प्रतीक रहीं, जिनकी जिंदगी समुद्र से गहराई से जुड़ी है। हाथ से किए गए काम में पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी की झलक दिखाई दी। मिस ओशियन वर्ल्ड के मंच पर केन्या की प्रतिभागी ने अपने कॉस्ट्यूम के जरिए संस्कृति, समुद्र और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता का संदेश दिया। रूस:आजादी और स्वतंत्रता के प्रतीक बने पंख रूस की प्रतिभागी ने अपने नेशनल कॉस्ट्यूम को 22 अगस्त को मनाए जाने वाले रूस के राष्ट्रीय ध्वज दिवस से जोड़ा। कॉस्ट्यूम में पंखों को प्रमुखता दी गई, जो उनके अनुसार रूस और उसके लोगों की स्वतंत्रता और स्वाधीनता का प्रतीक हैं। इस प्रस्तुति के जरिए उन्होंने अपने देश के राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति गौरव और सम्मान व्यक्त किया। साउथ सूडान:लोटुको महिला की खूबसूरती और मजबूती साउथ सूडान की प्रतिभागी का कॉस्ट्यूम वहां की लोटुको संस्कृति की महिला की खूबसूरती और मजबूती को दर्शाता रहा। बीडवर्क से सजे परिधान ने पारंपरिक सौंदर्य को सामने रखा, जबकि स्कर्ट को विवाहित महिला की पारंपरिक पोशाक से जोड़ा गया। इस कॉस्ट्यूम में उद्देश्य, आत्मविश्वास और प्रेम की भावना को दर्शाया गया। इसमें इस्तेमाल की गई पशु-त्वचा मजबूती और टिकाऊपन का प्रतीक बताई गई। ऐसे परिधान खासतौर पर विवाह, जीत और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों पर पहने जाने की परंपरा से जुड़े हैं। यूनाइटेड किंगडम:सीवीड फार्म से दिया ‘क्लीन ओशन’ का संदेश नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड में यूनाइटेड किंगडम की प्रतिभागी मॉली-मैरी का कॉस्ट्यूम सबसे अलग और पर्यावरण केंद्रित नजर आया। उनका परिधान ब्रिटेन में तेजी से विकसित हो रही सीवीड यानी समुद्री शैवाल की खेती की इंडस्ट्री से प्रेरित था। खास बात यह रही कि उन्होंने यह कॉस्ट्यूम सेकेंड हैंड और अपसाइकिल्ड सामग्री से खुद तैयार किया। कॉस्ट्यूम के पीछे लहराती लंबी पट्टियां ब्रिटेन के समुद्री शैवाल फार्म में इस्तेमाल होने वाली हैंगिंग लाइन्स को दर्शाती रहीं। इस प्रस्तुति के जरिए बताया गया कि समुद्री शैवाल के फार्म पानी को साफ रखने, पोषक तत्वों के बहाव को कम करने, समुद्री जीव-जंतुओं को सहारा देने और समुद्र तटों की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं। कॉस्ट्यूम ने रचनात्मकता, सस्टेनेबिलिटी और क्लीन ओशन को एक साथ मंच पर उतारा। जिम्बाब्वे:रंगों और बीडवर्क में संस्कृति की पहचान जिम्बाब्वे की प्रतिभागी ने अपने नेशनल कॉस्ट्यूम के जरिए देश की संस्कृति, विरासत और पहचान को प्रस्तुत किया। चमकीले रंग, बारीक बीडवर्क और पारंपरिक आभूषण इस परिधान की खासियत रहे। कॉस्ट्यूम में जिम्बाब्वे की महिलाओं की खूबसूरती, रचनात्मकता और मजबूती को दर्शाया गया। रंगों की विविधता ने देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता को सामने रखा, जबकि हाथ से किए गए काम ने पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी की परंपरा को प्रदर्शित किया। मिसेज इंडिया:मोर के पंखों में दिखी भारत की आत्मा मिसेज इंडिया की प्रतिभागी ने भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को अपने नेशनल कॉस्ट्यूम की थीम बनाया। रंग-बिरंगे पंखों से सजा यह कॉस्ट्यूम भारतीय संस्कृति की खूबसूरती, विविधता, शान और गौरव का प्रतीक रहा। उनकी प्रस्तुति में भारत के अलग-अलग रंगों और क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया गया। कॉस्ट्यूम के माध्यम से हिमालय से लेकर महासागर तक फैले भारत और प्राचीन परंपराओं से लेकर आधुनिक सपनों तक की यात्रा को सामने रखा गया। प्रस्तुति का संदेश रहा कि भारत सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों, परंपराओं और रंगों से बुना हुआ एक विशाल सांस्कृतिक संसार है। मिसेज रूस:ब्लैक सी के रेस्क्यू वॉलंटियर्स को सलाम मिसेज रूस का नेशनल कॉस्ट्यूम इस राउंड में सबसे अलग सामाजिक संदेश लेकर आया। उनका लुक रूस में ब्लैक सी में ऑयल और फ्यूल स्पिल से प्रभावित पक्षियों और जानवरों को बचाने वाले वॉलंटियर्स से प्रेरित था। उन्होंने सफेद केमिकल-प्रोटेक्शन सूट को अपने कॉस्ट्यूम का आधार बनाया। यह परिधान उन स्वयंसेवकों को समर्पित था, जो प्रभावित समुद्री जीवों और पक्षियों को बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस कॉस्ट्यूम के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्वयंसेवा की भावना को सम्मान दिया। मिसेज रूस ने अपनी प्रस्तुति के जरिए यह संदेश दिया कि किसी देश की सांस्कृतिक पहचान केवल पुराने पारंपरिक पैटर्न और संगीत से नहीं बनती, बल्कि आज समाज के लिए किए जा रहे सकारात्मक काम भी उस संस्कृति का हिस्सा बन सकते हैं। ‘क्लीन और पॉल्यूशन-फ्री ओशन’ रही पूरे आयोजन की थीम मिस ओशियन वर्ल्ड का पूरा आयोजन क्लीन और पॉल्यूशन-फ्री ओशन की थीम पर केंद्रित रहा। नौ दिनों तक चली विभिन्न गतिविधियों में प्रतिभागियों ने अपने-अपने अंदाज में समुद्र और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। ग्रैंड फिनाले की शुरुआत एनआईएफ ग्लोबल जयपुर के कमला पोदार इंस्टीट्यूट के डिजाइनिंग स्टूडेंट्स द्वारा डिजाइन की गई ड्रेसेज में ओपनिंग एक्ट से हुई। इसके बाद नेशनल कॉस्ट्यूम राउंड, पॉल्यूशन-फ्री एनवायरनमेंट एडवोकेसी राउंड और प्रश्न-उत्तर राउंड आयोजित हुए। इसके बाद क्राउन पासिंग सेरेमनी हुई, जिसे पूर्व मिस ओशियन वर्ल्ड लॉरा हडसन ने संपन्न कराया। आयोजन में 20 देशों की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। गाउन और स्विमसूट राउंड के दौरान हुए फोटोशूट में भी मॉडल्स ने क्लीन ओशन और पॉल्यूशन-फ्री पर्यावरण का संदेश दिया। जूरी ने परखा टैलेंट जूरी पैनल में जैस्मीन राणा, मिस ग्लोब इंडिया 2025, लॉरा हडसन, मिस ओशियन वर्ल्ड 2023, मिताली कौर, मिस इंटरकॉन्टिनेंटल इंडिया, प्रियन सैन, मिस ओशियन वर्ल्ड, चेयरमैन योगेश मिश्रा और जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा शामिल रहे। कार्यक्रम के मेकअप की जिम्मेदारी मेकअप शेड्स सैलून की जस्सी छाबड़ा ने संभाली, जबकि कोरियोग्राफी शाहरुख खान सुधीर ने की और मंच संचालन राकेश शर्मा ने किया। फ्यूजन ग्रुप के चेयरमैन एवं डायरेक्टर योगेश मिश्रा और निमिषा मिश्रा ने बताया कि राजस्थान के लिए यह गौरव की बात है कि दुनिया के टॉप-10 ब्यूटी पेजेंट्स में शामिल मिस ओशियन वर्ल्ड का आयोजन जयपुर में हुआ और इसमें 20 देशों की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।