राजसमंद के राज्यावास गांव में करीब 60 साल के बाद घास माता की पूजा-अर्चना का महोत्सव आयोजित किया जाएगा। आयोजन को लेकर अम्बामाता चौराहा पर ग्रामीणों की बैठक में सर्वसम्मति से 3 सितंबर को विधि-विधान से पूजा महोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया गया। महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में उत्साह का माहौल है। 60 साल बाद शुरू होगी परंपरा पूर्व सरपंच बाबूलाल खारोल के अनुसार करीब 50 से 60 वर्ष पहले गांव में ग्रामीणों द्वारा घास माता की पूजा-अर्चना की जाती थी। ग्रामीणों की मान्यता थी कि घास माता की पूजा से क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है, गांव में खुशहाली बनी रहती है और मवेशी निरोगी रहते हैं। समय के साथ यह परंपरा बंद हो गई। बैठक में युवाओं ने घास माता की पूजा की पुरानी परंपरा को दोबारा शुरू करने की पहल की। इस पर ग्रामवासियों ने सहमति जताते हुए गुरुवार को पूजा-अर्चना करने का निर्णय लिया। गाजे-बाजे के साथ निकलेगी शोभायात्रा महोत्सव के तहत गुरुवार दोपहर 2 बजे घास माता की प्रतिमा को गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में गांव में भ्रमण कराया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार माता की प्रतिमा का वजन 500 किलो से अधिक है। शोभायात्रा और पूजा महोत्सव को लेकर ग्रामीण तैयारियों में जुटे हैं।
बैठक में प्यार चंद खारोल, हरिराम, बालूराम, नाथूलाल, किशनलाल जाट, भवानी सिंह गौड़, कालूराम सुथार, सत्यनारायण पूर्बिया, बाबूलाल लोहार, हीरालाल तेली, देवकिशन सुथार, करणसिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।