राजस्थान में पाकिस्तान के जासूसी नेटवर्क का खुलासा औरंगाबाद (महाराष्ट्र) से रफीक चांद शेख की गिरफ्तारी के बाद हुआ है। 26 जनवरी को पकड़ा गया जैसलमेर का ई-मित्र संचालक झबरा राम सेना की गोपनीय जानकारियां भेज रहा था। इसके बदले मिलने वाली रकम रफीक फर्जी बैंक खातों के जरिए झबरा राम तक पहुंचाता था। जांच में पता चला कि ई-मित्र संचालक सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क आने के बाद हनीट्रैप में फंस गया था। अब दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पाकिस्तान को कौन-कौन सी संवेदनशील जानकारियां भेजी गईं और इस नेटवर्क में राजस्थान के अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। अब पढ़िए … सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम 1. जैसलमेर के गांव में ई-मित्र की दुकान चलाता था झबरा राम सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, झबरा राम मेघवाल (28) पुत्र भाना राम, जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र के नेडान गांव का रहने वाला है। गांव में उसकी ई-मित्र की दुकान है। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए काम कर रहा था। उसे 26 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह जेल में बंद है। 2. सोशल मीडिया पर हनीट्रैप में फंसा, फिर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ के अनुसार, झबरा राम करीब 20 महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आया। वह हनीट्रैप का शिकार हुआ और धीरे-धीरे देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया। उसने अपने भारतीय नंबर के व्हाट्सएप का ओटीपी भी पाकिस्तानी हैंडलर्स को दे दिया, जिसके बाद वे उसका व्हाट्सएप अकाउंट संचालित कर उसी के जरिए संवेदनशील जानकारियां सरहद पार भेजने लगे। 3. सेना की गोपनीय जानकारी भेजता था, रफीक संभालता था पैसों का नेटवर्क खुफिया सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर्स ने झबरा राम को जैसलमेर और पोकरण जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सेना की गतिविधियों, सैन्य वाहनों की आवाजाही, आर्मी कैंपों और रणनीतिक ठिकानों की तस्वीरें व वीडियो जुटाने का जिम्मा दिया था। हर टास्क पूरा करने के बदले उसे मोटी रकम मिलती थी। यह रकम सीधे भेजने के बजाय आईएसआई ने औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख का इस्तेमाल किया। रफीक ने अपने और करीबियों के नाम पर कई फर्जी बैंक खाते खुलवा रखे थे। पाकिस्तान से पैसा पहले इन्हीं खातों में आता था और फिर रफीक कमीशन काटकर रकम झबरा राम तक पहुंचाता था। 4. तीन मोबाइल इस्तेमाल किए, एयरफोर्स कर्मचारी से भी जुड़े तार जांच में सामने आया कि झबरा राम सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए तीन अलग-अलग मोबाइल नंबर और हैंडसेट इस्तेमाल करता था। इस नेटवर्क का दायरा सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) सुमित कुमार को भी जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार सुमित कुमार और झबरा राम दोनों रफीक चांद शेख के इसी वित्तीय नेटवर्क से जुड़े हुए थे। 5. बैंक खातों की जांच से खुल सकते हैं कई राज, आमने-सामने होगी पूछताछ सीआईडी इंटेलिजेंस अब रफीक के पास मिले फर्जी बैंक खातों और झबरा राम के बैंक स्टेटमेंट का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि जासूसी से मिली रकम का इस्तेमाल झबरा राम ने पश्चिमी राजस्थान में अपना नेटवर्क बढ़ाने और कुछ स्थानीय लोगों को लालच देकर जोड़ने में किया हो सकता है। जून 2026 के अंत में औरंगाबाद से रफीक चांद शेख की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क की जांच में जुटी है। — जासूसी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए … पाकिस्तानी हैंडलर्स चला रहे थे जैसलमेर के युवक का वॉट्सऐप:हनीट्रैप में फंसकर ई-मित्र संचालक ने ISI को भेजी खुफिया जानकारी; गिरफ्तार जैसलमेर में जासूसी के शक में पकड़े गए ई-मित्र संचालक का वॉट्सऐप पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स चला रहे थे। पूरी खबर पढ़िए