राजस्थान में एक तरफ आरजीएचएस योजना में फर्जी बिलों से पेमेंट उठाने का बड़ा घोटाला सामने आया है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मां) में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 850 रुपए में फ्री इलाज और जांचों से जुड़ी योजना प्रदेश में 12 साल से संचालित हैं। 12 साल में इस योजना से राजस्थान के 1720 प्राइवेट अस्पताल ही जुड़े। वहीं पिछले 2 माह में ही आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी के तहत उत्तरप्रदेश के 6182 अस्पताल जुड़ गए। इनमें ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल हैं। एकाएक इतनी बड़ी संख्या में अस्पतालों के जुड़ जाने से योजना में फर्जीवाड़ा होने से आसार बढ़ गए हैं। जानकारों का कहना है कि राजस्थान से करीब 4 गुणा ज्यादा अस्पताल यूपी के जुड़ना गंभीर मामला है। मां योजना की पोर्टेबिलिटी बढ़ने से राजस्थान की तरह ही यूपी के भी अस्पतालों में मां योजना के तहत अब कार्ड धारक फ्री इलाज करा सकेंगे। दिल्ली से 60 गुणा यूपी के अस्पताल जुड़े मां योजना का दायरा बढ़ाकर राष्ट्रीय कर दिया है। इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी के तहत अब तमिलनाडु और कर्नाटक को छोड़ कर देश के किसी राज्य में मां योजना के तहत इलाज करा सकेंगे। इसमें पड़ोसी राज्यों के प्रमुख अस्पताल भी शामिल हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि दिल्ली नजदीक होने के बावजूद दिल्ली से 60 गुणा ज्यादा अस्पताल यूपी के जुड़ गए। दिल्ली के 184, गुजरात के 2067, हरियाणा के 1366, मध्य प्रदेश के 1622, महाराष्ट्र के 1709, पंजाब के 823 और उत्तर प्रदेश के 6182 अस्पताल इस योजना में सूचीबद्ध हैं। इसमें दिल्ली एवं भोपाल के एम्स, मेदांता, चंडीगढ़ का पीजीआइ, लखनऊ का केएमपीयू, गुजरात के यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एण्ड रिसर्च सेंटर, द गुजरात कैंसर एंड रिसर्च सेंटर, बनास मेडिकल कॉलेज एण्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पालनपुर, सहित कई नामी अस्पताल शामिल हैं। पैकेज भी 400 बढ़ाए: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार योजना में शुरुआत में पहले विभिन्न बीमारियों के 1800 पैकेज थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 2200 हो गई हैं। योजना में कैंसर के 73 नए डे-केयर पैकेज जोड़े गए हैं।