जैसलमेर. विवाह के बाद जिंदगी के हर मोड़ पर साथ चलने वाले भगवानदास खत्री और उनकी पत्नी पुष्पा ने अब जीवन के बाद भी साथ निभाने का संकल्प लिया है। भगवानदास ने पत्नी से कहा कि उनकी देह चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के काम आ सके तो इससे बेहतर उपयोग क्या होगा। पुष्पा ने पति की बात सुनी और कहा कि जब जीवनभर साथ दिया है तो इस संकल्प में भी साथ रहेंगी। दोनों ने एम्स जोधपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है। भगवानदास के लिए यह फैसला अचानक लिया गया निर्णय नहीं है। उनका जीवन ही सेवा की सोच के इर्द-गिर्द आगे बढ़ता रहा है। 2 अक्टूबर 1956 को रामगढ़ में जन्मे भगवानदास ने जैसलमेर में शिक्षा पूरी की। वर्ष 1976 में राजस्थान लोक सेवा आयोग की लिपिक परीक्षा उत्तीर्ण की और 22 मई 1978 को जिला कलक्टर कार्यालय जैसलमेर में राजकीय सेवा शुरू की। 31 अक्टूबर 2016 को 38 साल की सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुए। नौकरी खत्म हुई, लेकिन सेवा का सिलसिला नहीं।