उदयपुर में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सालय में भर्ती जुड़वां नवजात शिशुओं को 60 दिन तक चले गंभीर इलाज के बाद बुधवार को डिस्चार्ज किया गया। जुडवां शिशु 50 बेडेड आउटबॉर्न नर्सरी में भर्ती थे। जयसमंद निवासी रमेश और काली बाई की संतान थे। बेहद कम वजन और मात्र 29 सप्ताह के गर्भकाल में जन्मे इन दोनों बच्चों को बचाना डॉक्टर्स के लिए बड़ी चुनौती थी। जन्म के समय दोनों नवजात का वजन 1 किलो था काली बाई ने 4 जून को सलूंबर के गीतांजली अस्पताल जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के समय दोनों शिशुओं में एक का वजन 1.10 किलो और दूसरे का 1.05 किलो था। जन्म के करीब दो घंटे बाद दोनों नवजातों को बाल चिकित्सालय अस्पताल की नर्सरी में भर्ती कराया गया। जहां यूनिट-डी में डॉ. अनुराधा सनाढ्य के निर्देशन में उनका इलाज शुरू किया गया। फेफड़े पूर्ण विकसित नहीं होने के कारण दोनों शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद सर्फेक्टेंट थेरेपी (पहले जन्मे नवजात को रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम) दी गई। इलाज के दौरान उन्हें 10 दिन तक वेंटिलेटर और 22 दिन तक सीपीएपी सपोर्ट पर रखा गया। डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी और देखभाल से दोनों शिशुओं की स्थिति में लगातार सुधार होता गया। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में हुआ नि:शुल्क इलाज हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने बताया- मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत दोनों बच्चों का इलाज निःशुल्क किया गया। इस दौरान पहले शिशु के इलाज पर लगभग 2.25 लाख और दूसरे शिशु पर 2.50 लाख का खर्च आया। विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अरोड़ा ने बताया- 29 सप्ताह में जन्मे और अत्यंत कम वजन वाले नवजात शिशुओं का जीवित बचना सामान्य रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में दोनों जुड़वां बच्चों का स्वस्थ होकर घर लौटना डॉक्टर्स की बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। डिस्चार्ज के समय एक बच्चे का वजन 1.325 किलो और दूसरे का 1.345 किलो था। वर्तमान में दोनों शिशु और उनकी मां पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसमें डॉ. अनुराधा सनाढ्य के नेतृत्व में डॉ. निशांत डांगी, डॉ. नेहा असोरा, डॉ. शिंथू, डॉ. नितीश, डॉ. ऋचा जोशी, डॉ. श्रुतकीर्ति, डॉ. लक्ष्य शर्मा तथा नर्सिंग स्टाफ का योगदान रहा।
