रणथंभौर में पेड़ पर चढ़कर मस्ती करने वाला बाघिन रिद्धि का शावक फिर त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले रास्ते पर पहुंच गया। टाइगर को देखकर टूरिस्ट ठहर गए। करीब 15 मिनट तक वह सड़क के आसपास घूमता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने शावक की तस्वीरें और वीडियो बनाए। घटना शनिवार सुबह करीब 6:15 बजे गणेश मार्ग स्थित मजार के पास की है। बता दें, रिद्धि के शावक की अक्सर त्रिनेत्र गणेश मार्ग वाले एरिया में मूवमेंट रहती है। 13 मई को भी रास्ते में आने से लंबा जाम लग गया था। काफी देर सड़क पर टहलने के बाद वह वापस जंगल में चला गया था। वह अक्सर अपनी एक्टिविटी से टूरिस्ट का ध्यान खींचता है। बाघिन रिद्धि का शावक, तस्वीरों में देखें … लेपर्ड को बैठा देख ठहरे टूरिस्ट जानकारी के अनुसार, मजार के पास बाघिन रिद्धि का शावक बैठा दिखाई दिया। कुछ देर बाद शावक सड़क पर टहलने लगा। इस दौरान वह पूरी तरह शांत नजर आया और सड़क किनारे आराम से घूमता रहा। अचानक मार्ग पर बाघ के शावक की मौजूदगी से वहां मौजूद लोगों में उत्साह के साथ-साथ हल्का डर भी बना रहा, लेकिन सभी लोग सुरक्षित दूरी बनाकर उसे देखते रहे। 15 मिनट बाद आराम से जंगल की तरफ लौटा घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी तुरंत मौके पर पहुंच गई। वनकर्मियों ने शावक की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी। करीब 15 मिनट तक मूवमेंट करने के बाद शावक आराम से जंगल की ओर लौट गया, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली। शिकार के लिए पेड़ पर चढ़ा गया था टाइगर रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 13 जनवरी की शाम बाघिन रिद्धि का शावक पेड़ पर चढ़ा था। पेड़ की शाखाओं पर मस्ती करता दिखाई दिया था। इसके बाद वह छलांग लगाकर नीचे उतरता है। इस दौरान उसकी मां बाघिन रिद्धि पेड़ के नीचे बैठी थी। मलिक तालाब के पास इस नजारे को वहां मौजूद पर्यटकों ने मोबाइल और कैमरों में कैद कर लिया। तीन साल के हैं रिद्धि के शावक रणथंभौर नेशनल पार्क की बाघिन रिद्धि को वन विभाग ने T-124 नंबर दिया है। रिद्धि की उम्र करीब 7 साल है। उसका जन्म अक्टूबर-नवंबर 2018 में हुआ था। रिद्धि, बाघिन ऐरोहेड (T-84) की बेटी है। वह मुख्य रूप से रणथंभौर के जोन-3 और जोन-4 में विचरण करती है। बाघिन रिद्धि अब तक दो बार मां बन चुकी है। फिलहाल वह अपने दोनों शावकों को वाइल्ड लाइफ ट्रेनिंग दे रही है। दोनों शावकों की उम्र करीब तीन साल बताई जा रही है। वजन बढ़ने पर पेड़ पर चढ़ना बंद करते हैं टाइगर वन विभाग के अधिकारियों ने बताया- बाघ और बाघिन जब छोटे होते हैं, तब वे पेड़ों पर आसानी से चढ़ जाते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उनका वजन बढ़ता है, वे पेड़ों पर चढ़ना बंद कर देते हैं। इसलिए शावक को पेड़ पर चढ़ते देखना एक दुर्लभ और आकर्षक नजारा माना जाता है। — रणथंभौर में टाइगर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें … बाघ की वजह से रुकी परिक्रमा, VIDEO:रणथंभौर में परिक्रमा मार्ग पर घूमता रहा, डेढ़ घंटे तक श्रद्धालुओं को रोक कर रखा बाघ की वजह से बुधवार को निकलने वाली चौथ परिक्रमा को डेढ़ घंटे तक रोका गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई और वे वीडियो बनाने लगे। पूरी खबर पढ़िए वनकर्मियों पर झपटने वाले टाइगर ने रोका पर्यटकों का रास्ता:एक घंटे तक गाड़ियों के सामने घूमता रहा; वाहनों की लगी लंबी लाइनें सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में टाइगर ने पर्यटकों का रास्ता रोक दिया। बुधवार दोपहर टाइगर अचानक त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर पहुंच गया। पूरी खबर पढ़िए