लुधियाना जिले की पायल नगर कौंसिल में सोमवार को होने वाले प्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव ऐन मौके पर हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद स्थगित कर दिए गए। आम आदमी पार्टी (आप) के एक पार्षद, जिन्हें उपप्रधान पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, के अचानक गायब हो जाने के कारण आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। नगर कौंसिल के प्रशासक एवं एसडीएम (SDM) प्रीतइंद्र सिंह बैंस ने उपस्थित पार्षदों को केवल पद की शपथ दिलाई और घोषणा की कि चुनाव की अगली तारीख की सूचना 48 घंटे पहले दी जाएगी। इस घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित किया है। क्योंकि 11 में से तीन पार्षद जीतने वाली आप ने एक निर्दलीय और एक कांग्रेस विधायक को अपने पाले में लेकर बहुमत की फिराक में था। ऐन मौके पर ‘आप’ का दावेदार पार्षद लापता, फोन भी बंद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी के जिस पार्षद को उपप्रधान पद की रेस में सबसे आगे माना जा रहा था, वह बैठक शुरू होने से ठीक पहले रहस्यमयी ढंग से गायब हो गया। पार्टी नेताओं और रणनीतिकारों ने उससे संपर्क साधने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन लगातार बंद आता रहा। काफी तलाश के बावजूद जब वह बैठक में नहीं पहुंचा, तो ‘आप’ खेमे में खलबली मच गई। कोरम की शर्त अटकने से रुकी प्रक्रिया नियमों के अनुसार, नगर कौंसिल में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए कुल पार्षदों के न्यूनतम 50 प्रतिशत (आधे से अधिक) की उपस्थिति यानी कोरम पूरा होना अनिवार्य है। निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब यह कोरम पूरा नहीं हो पाया, तो चुनाव अधिकारी को बैठक स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा। बहुमत के बावजूद बिगड़ गया ‘आप’ का राजनीतिक समीकरण पार्टी ने चुनावों में केवल 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बाद में ‘आप’ ने रणनीतिक बढ़त लेते हुए एक निर्दलीय और कांग्रेस के एक पार्षद को अपने पाले में कर लिया था। इसके बाद पार्टी का बहुमत के साथ प्रधान और उपप्रधान पद पर कब्जा लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन ऐन मौके पर अपने ही सिपहसालार के गायब हो जाने से पूरी राजनीतिक बिसात पलट गई और ‘आप’ के भीतर व बाहर कई तरह की चर्चाएं और सवाल शुरू हो गए हैं। खामोश हुए ढोल-नगाड़े, समर्थकों में छाई मायूसी इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के चलते नगर कौंसिल कार्यालय के बाहर सुबह से जमी समर्थकों और लोगों की भारी भीड़ के बीच गहमागहमी बढ़ गई। जो कार्यकर्ता और समर्थक हाथों में लड्डू और ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाने पहुंचे थे, उनके चेहरों पर मायूसी छा गई। ढोल-नगाड़े धरे के धरे रह गए और समर्थकों को बिना किसी नतीजे के बैरंग लौटना पड़ा। फिलहाल, पायल की सियासत में सबसे बड़ा सस्पेंस यही बना हुआ है कि जिस पार्टी ने बहुमत जुटाने के लिए इतनी गोटियां फिट की थीं, उसका अपना ही मुख्य पार्षद चुनाव के दिन क्यों और किसके इशारे पर गायब हुआ?
