उदयपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा- राजस्थान में सरकार अफसरों के भरोसे चल रही है। यहां भाजपा अपने पैर पीट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वे मंगलवार शाम को उदयपुर के जिंक स्मेल्टर देबारी में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पायलट ने कहा कि राजस्थान में जनप्रतिनिधियों की बजाय अधिकारियों के बल पर सरकार चल रही है। सत्ताधारी दल के जो मंत्री, सांसद और विधायक भी अपने पैर पीट रहे हैं, उनकी कोई सुन नहीं रहा है। उनकी जवाबदेही तय नहीं हो रही है। ये बहुत संकट का समय है। उन्होंने कहा- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फेर दिया और सरकार रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है। पेपर और रिजल्ट में हो रही गड़बड़ी सचिन पायलट ने कहा- छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी परिणाम चाहिए, लेकिन पेपर और रिजल्ट दोनों में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली और जयपुर की सरकारें अपने-अपने स्तर पर असफल साबित हुई हैं। राज्य सरकार ने आधा कार्यकाल बीतने के बावजूद जनता से किए गए वादे पूरे नहीं किए। उन्होंने कानून व्यवस्था, शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। पायलट ने कहा- प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्कूलों की छतें गिरने से बच्चों की मौत हो रही है। हाईकोर्ट को सरकार को फटकार लगानी पड़ रही है, लेकिन जवाबदेही तय नहीं की जा रही। उन्होंने आरोप लगाया- सड़क हादसों, अपराध और दुष्कर्म की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने पंचायत, निकाय और छात्रसंघ चुनाव समय पर नहीं कराने को लेकर भी सरकार को घेरा। पायलट ने कहा कि संविधान के अनुसार हर पांच साल में चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है, क्योंकि उसे जनता के गुस्से का डर है। असली जिम्मेदारों पर नहीं हो रही कार्रवाई केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा- 12 साल के शासन के बाद सत्ता में अहंकार आ गया है। पायलट ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा- करोड़ों रुपए के कथित गबन के मामले में असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने प्रधानमंत्री के “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” वाले नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में केवल लीपापोती की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब संसद जब चलती है, तब कोई जवाब नहीं देता है। विपक्ष की आवाज को दबाने का काम होता है। ये गैर संवैधानिक और गैर कानूनी रूप से परिसीम​न का बिल पारित करना चाहते हैं, जबकि एक प्रणाली होती है, जनणगना होती है परिसीमन आयोग बनता है। इसके बाद उसकी सिफारिश के बाद संसद में कार्रवाई होती है। ईंधन नीति पर बोलते हुए पायलट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एथेनॉल संबंधी निर्णयों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता पर थोपा जा रहा है, जबकि लोगों को अपनी पसंद का विकल्प मिलना चाहिए। किसान खुश नहीं, युवा परेशान पायलट ने दावा किया कि आज किसान खुश नहीं हैं, युवा परेशान है और जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है और पार्टी का लक्ष्य भाजपा सरकार की नीतियों को जनता के सामने उजागर कर आगामी विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाना है। मेरे दौरे में हर जगह कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। इस दौरान उदयपुर देहात के अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा, शहर अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़, मावली विधायक पुष्करलाल डांगी, पूर्व मंत्री डा. मांगीलाल गरासिया, कांग्रेस नेता पंकज शर्मा आदि ने पायलट का स्वागत किया।