पठानकोट के मिशन रोड स्थित शांत विहार इलाके में धड़ल्ले से चल रहे गैर-कानूनी निर्माण को रोकने में नगर निगम के अधिकारी फेल साबित हुए हैं। निगम अधिकारियों की मानें तो 5 महीने से जारी एक मकान के निर्माण को 5 से अधिक बार रोका गया। लेकिन, कोठी बना रहे व्यक्ति ने काम नहीं रोका। वहीं, रविवार को छुट्टी का फायदा उठाकर लैंटर का काम शुरू करवा दिया गया। शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे नगर निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने खानापूर्ति कर काम फिर से बंद करवाया। लेकिन, उसके वहां से निकलते ही निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया। वहीं, दूसरी ओर शिकायतकर्ता योगराज शर्मा ने नगर निगम के उच्च अधिकारियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। जबकि, कोठी का निर्माण करवा रहे अशोक वर्मा का तर्क है कि उनके पहले भी यहां अनेकों घर बन चुके हैं, उनमें से कईयों के पास एनओसी नहीं है। लेकिन, नगर निगम और आर्मी की ओर से उन्हें ही टार्गेट किया जा रहा है। जोकि, न्यायसंगत नहीं है। शिकायत के बाद आर्मी की लीगल टीम भी पहुंची बता दें, सेना के एम्युनिशन डिपो के आसपास 1 हजार मीटर का क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील और प्रतिबंधित घोषित है। नियमों के अनुसार, इस दायरे में बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। रविवार को जानकारी मिलने पर सेना की लीगल विंग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल बंद करवा दिया। लेकिन, सेना की टीम के निकलते ही निर्माण फिर से शुरू करवा दिया गया। अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा काम – योगराज शर्मा मामले को लेकर शिकायतकर्ता योगराज शर्मा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा- पठानकोट एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां पूर्व में एयरफोर्स बेस पर बड़ा आतंकी हमला हो चुका है। ऐसे संवेदनशील शहर में बिना मंजूरी के अवैध निर्माण होना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। इस विषय को लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, पंजाब के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पठानकोट के डिप्टी कमिश्नर और नगर निगम को साक्ष्यों सहित लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। अधिकारियों पर संरक्षण देने का आरोप- योगराज शर्मा का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों द्वारा धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और नगर निगम के उच्च अधिकारी उनके साथ मिले हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अधिकारियों की मिलीभगत के रिकॉर्डिंग और ठोस सबूत हैं, जिन्हें समय आने पर जनता के सामने लाया जाएगा। बार-बार काम बंद करवाया फिर भी निर्माण जारी नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच ने इस अवैध निर्माण को कई बार बंद करवाया, नोटिस दिए गए। 2 जून को नगर निगम ने उपायुक्त डॉ. पल्लवी के दिशा-निर्देशों पर दूसरी बार निर्माण बंद करवाया गया था। सीलिंग पोस्टर फाड़े गए: सीलिंग के बाद मौके पर लगाए गए आधिकारिक आदेशों के पोस्टरों को अज्ञात तत्वों द्वारा हटा दिया गया, जो प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है। कार्रवाई में नाकामी पर सवाल: इसके बाद 5 बार काम रुकवाने के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी रहा। अधिकारियों द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की बात कहे जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर लगातार प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। सोमवार को पूरी इमारत करेंगे सील बिल्डिंग इंस्पेक्टर समीर डोगरा का कहना है कि आदेशों का उल्लंघन करने वालों और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ प्रक्रिया अपनाई जा रही है तथा अवैध निर्माण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोमवार को इस इमारत को सील करने के आदेश जारी किए जाएंगे। आर्मी से चल रहा केस, अदालत का फैसला मंजूर अवैध निर्माण के संबंध में पूछने पर कोठी का निर्माण करवा रहे अशोक वर्मा ने कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले यहां प्लॉट खरीदा था। प्लॉट खरीदने से पहले ही यहां काफी कोठियों का निर्माण हो रखा था। लेकिन, उन्हें तंग किया जा रहा है। बार-बार निर्माण बंद करवाया जा रहा है। आर्मी ने पहले से उनपर केस कर रखा है। अदालत का जो भी फैसला आएगा उन्हें मंजूर है।
