राजस्थान हाईकोर्ट ने कंपाउंडर/नर्स जूनियर ग्रेड पद पर चयनित दिव्यांग अभ्यर्थी की नियुक्ति से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने एम्स की रिपोर्ट को आधार मानते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने एम्स जोधपुर की मेडिकल रिपोर्ट को आधार माना। रिपोर्ट में अभ्यर्थी के बाएं पैर में 70% स्थायी लोकोमोटर दिव्यांगता थी, जबकि दाएं पैर में कोई नहीं। राज्य ने इस रिपोर्ट को चुनौती नहीं दी। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की बेंच ने राज्य सरकार की अपील पर आदेश दिया। यह अपील 112 दिन की देरी से दायर हुई थी, जिसे कोर्ट ने माफ कर सुनवाई की। कंपाउंडर/नर्स जूनियर ग्रेड पद पर हुआ था चयन मुकेश कुमार मीणा का आयुर्वेद विभाग में कंपाउंडर/नर्स जूनियर ग्रेड पद पर चयन हुआ था। 8 सितंबर 2025 को उनका चयन रद्द किया गया। राज्य की दोबारा मेडिकल जांच में दोनों पैरों में दिव्यांगता बताकर उन्हें अयोग्य माना गया। सिंगल बेंच के निर्देश पर एम्स जोधपुर मेडिकल बोर्ड ने दो बार जांच की। दोनों रिपोर्टों में बाएं पैर में 70% दिव्यांगता और दाएं पैर में कोई नहीं होने की पुष्टि हुई। कोर्ट ने माना कि भर्ती विज्ञापन की पात्रता पूरी होती है और सिंगल बेंच का नियुक्ति आदेश सही है। हाईकोर्ट ने राज्य की अपील खारिज की।