नमस्कार राहुल गांधीजी ने बड़े ही नाटकीय ढंग से नेतागण को ‘तपस्या’ के गुर सिखाए। RSS ने एक लीटर पानी से नहाने की नसीहत दी तो पूर्व मंत्रीजी झील में कूद गए। बहादुर सीआई मैडम ने हथियारबंद बदमाश को दौड़कर दबोच लिया और पेड़ बचाने की जिद के आगे आंधी को भी झुकना पड़ा। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. राजेंद्र गुढ़ा का स्नान ज्ञान ईंधन बचाने के आह्वान के बाद रसोई में काम आने वाला तेल बचाने का मंत्र दिया गया। इसके बाद टोंक में RSS ने 1 लीटर पानी में नहाने की ट्रेनिंग देकर पानी बचाने का संदेश दे दिया। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कोई मैसेज नहीं दिया। उन्होंने झील में छलांग लगा दी। झील के एक सिरे से दूसरे सिरे तक तैरे। पानी पर कलाबाजियां दिखाईं और खूब नहाए। हालांकि इस तरह के स्नान में एक लीटर पानी भी नहीं बहाया गया। नहाकर निकले तो कुछ बूंदें बहकर पौधों में चली गईं। 2. बहादुर CI मैडम लड़के ने एक साल से रंजिश पाल रखी थी। बदला लेने की नीयत से उसने लोडेड पिस्टल पैंट में खोंस ली। वह दुश्मन का खात्मा करने निकल चुका था। उसे पता नहीं था कि इस काम के लिए ‘जिगरा’ चाहिए। पुलिस की नाकाबंदी देख उसके होश फाख्ता हो गए। उसने दौड़ लगा दी। इधर नाकाबंदी पर तैनात सीआई मैडम को भागते नकाबपोश युवक पर शक हुआ। मैडम ने लड़के के पीछे दौड़ लगा दी। आगे अपराध पीछे कानून। लड़का फिजिकली फिट लग रहा था, इसके बावजूद मैडम के हौसले के सामने वह फिटनेस टेस्ट में फेल हो गया। मैडम ने उसे ज्यादा दूर तक भागने नहीं दिया। दबोचते ही दूसरे पुलिसकर्मी भी आ गए। तलाशी ली तो पिस्टल निकल आई। अब सर लोगों के बीच एक ही चर्चा है- मैडम ने खूब ‘जिगरा’ दिखाया। 3. गिराने-बचाने की जद्दोजहद शायर का तो पता नहीं लेकिन शेर मशहूर है- फलक को जहां जिद है बिजलियां गिराने की। हमें भी जिद है वहीं आशियां बनाने की। आंधी पूरे जोर पर थी। उसका अहंकार इसलिए भी बढ़ा हुआ था क्योंकि उसने रास्ते में बड़े-बड़े उद्योगपतियों के प्रोजेक्ट की हवा निकाल दी थी। रावण-कुंभकर्ण के पुतलों जैसे विशालकाय बिजली के खंभों को धूल चटा दी थी। बड़े-बड़े शहरों को धूल में पाट दिया था। मंत्री, विधायक, अफसर, कर्मचारी, बिजनेसमैन, आमजन सबको बराबर भाव से गुबार की चादर ओढ़ा दी थी। बीकानेर में भी अपने वेग की ताकत दिखाती आंधी आगे बढ़ी तो रास्ते में एक छोटा सा पेड़ अड़ गया। उसकी इतनी जुर्रत? आंधी ने उसे गिराने के लिए हवा को लहराया, लेकिन तभी एक युवक घर से निकलकर आया और दोनों हाथों से पेड़ के पतले तने को थाम लिया। इधर गिराने की जिद और उधर बचाने की। बहुत देर तक मशक्कत चली। आखिरकार जोर के सामने साहस जीत गया। आंधी हारकर आगे बढ़ गई। मौसम शांत हुआ। पेड़ को भी पता पड़ गया कि उनका संरक्षण कोरी नारेबाजी से नहीं हो सकता। किसी न किसी को जूझना पड़ेगा। 4. चलते-चलते… ‘न पूजा करो, न परिक्रमा लगाओ। बस तपस्या करो।’ लीडर नेताजी की इस बात पर जिलाध्यक्ष भौचक्के रह गए। नेताजी ने डिंपल वाली मुस्कान बिखेरी। कहा- पता था नहीं समझोगे। पूर्व मंत्रीजी आप मंच पर आ जाओ। आदेश का पालन करते हुए पूर्व मंत्रीजी मंच पर आ गए। नेताजी ने दूसरा आदेश दिया- चीफ साहब की कुर्सी खींच लो। दूसरे आदेश पर दूसरी बार जिलाध्यक्ष भौचक्के रह गए। नेताजी ने फिर उसी मुस्कान के साथ कहा- पता था नहीं समझोगे। एक जिलाध्यक्ष ने मन ही मन कहा- अरे भई कहना क्या चाहते हो? साफ-साफ बोलो। बातों की जलेबी काहे बना रहे हो? इधर, पूर्व मंत्रीजी ने ‘कटप्पा’ बनकर चीफ साहब की कुर्सी खींच ली। नेताजी बोले- ऐसा नहीं करना है। कुर्सी की खींचतान नहीं करनी। मन में सोचने वाले जिलाध्यक्ष ने मन में फिर सोचा- कुर्सी खिंचवाकर ये कहने की कहां जरूरत थी कि कुर्सी नहीं खींचनी? नेताजी ने चीफ साहब को भगवान विष्णु की मूर्ति बनाकर बीच में खड़ा कर दिया। जिलाध्यक्षों से कहा- इनकी परिक्रमा लगाओ। जिलाध्यक्ष ने मन में सोचा- यह कौन सी नई बात है। यह तो हम करते ही रहते हैं। नेताजी ने कहा- यह नहीं करना। सब फिर भौचक्के रह गए। फिर करना क्या है नेताजी? एक जिलाध्यक्ष ने यह बात मन में सोची। नेताजी ने जैसे मन पढ़ लिया हो। बोले- करना ये है कि पैरों में गिरने वाले को टिकट नहीं देना। तपस्या करने वाले को टिकट मिलेगा। जिलाध्यक्ष ने मन में सोचा- तपस्या धूणां जलाकर करनी है या फिर चिमटा गाड़कर? नेताजी बोले- जनता के बीच जाकर तपस्या करनी है। उम्मीद करता हूं कि नाटक के जरिए समझ गए होंगे। 10 दिवसीय चिंतन शिविर का भौचकपूर्ण समापन हुआ। इधर जिलाध्यक्षों में चर्चा है कि तपस्या करने के लिए कौन सा मुहूर्त श्रेष्ठ रहेगा। इनपुट सहयोग- महावीर बैरवा (टोंक), इम्तियाज भाटी (झुंझुनूं), अनूप पाराशर (उदयपुर), अनुराग हर्ष (बीकानेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी