एक किलो डोडा-चूरा की सप्लाई पर 200 रुपए कमाई के लाचल में कंटेनर ड्राइवर तस्कर बन गया। डाक-पार्सल के कंटेनर में मादक पदार्थ छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाता था, क्योंकि ऐसे वाहनों पर आमतौर पर कम शक होता है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को सूचना मिली तो नाकाबंदी की गई। पुलिस को देखकर ड्राइवर कंटेनर लेकर भागने लगा, लेकिन पीछा कर सदर थाना क्षेत्र में उसे पकड़ लिया गया। तलाशी में 3 क्विंटल 83 किलो डोडा-चूरा बरामद हुआ और ड्राइवर को कर लिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि डूंगरपुर का रहने वाला आरोपी तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद उसने मजदूरी की, ट्रकों में खलासी का काम किया, ड्राइविंग सीखी और कंटेनर ड्राइवर बन गया। पिछले 7-8 महीनों के दौरान उसकी पहचान तस्करों से हुई और ज्यादा कमाई के लालच में वह इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया। पीछा कर कंटेनर पकड़ा; तलाशी में मिला डोडा-चूरा आईजीपी विकास कुमार ने बताया – ANTF को सूचना मिली थी कि उदयपुर से भीलवाड़ा की ओर जा रहे डाक-पार्सल कंटेनर में संदिग्ध सामान है। सूचना मिलते ही टीम ने नाकाबंदी कर निगरानी शुरू कर दी। कंटेनर पहुंचने पर पुलिस ने ड्राइवर को रुकने का इशारा किया, लेकिन उसने गाड़ी नहीं रोकी और भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने पीछा कर सदर थाना क्षेत्र में कंटेनर रुकवाया। पूछताछ के दौरान ड्राइवर घबरा गया। स्थानीय पुलिस को बुलाकर कंटेनर की तलाशी ली गई, जिसमें 3 क्विंटल 83 किलो डोडा-चूरा बरामद हुआ। इसके बाद कंटेनर जब्त कर ड्राइवरलाल शंकर (29) को गिरफ्तार कर लिया गया। मजदूरी से कंटेनर ड्राइवर बना, फिर तस्करों के संपर्क में आया पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की और फिर मजदूरी करने लगा। बाद में ट्रकों में खलासी का काम किया, वहीं ड्राइविंग सीखी और धीरे-धीरे कंटेनर ड्राइवर बन गया। दिल्ली के एक कंटेनर मालिक के यहां नौकरी मिलने के बाद वह पिछले 7-8 महीनों से अहमदाबाद, दिल्ली और अन्य राज्यों के बीच कंटेनर चला रहा था। इसी दौरान उसकी पहचान मादक पदार्थ तस्करों से हुई और उसे अवैध माल ढोने का ऑफिर मिला। 200 रुपए प्रति किलो के लालच में करने लगा तस्करी पुलिस जांच में सामने आया कि कुछ समय पहले आरोपी कंटेनर लेकर अपने गांव गया था। अगले दिन उसकी मुलाकात एक तस्कर से हुई। तस्कर ने बताया कि कंटेनर मालिक से बात हो चुकी है और अब कंटेनर में डोडा-चूरा छिपाकर तय जगह तक पहुंचाना है। इसके बदले उसे प्रति किलो 200 रुपए अतिरिक्त देने की बात कही गई। ज्यादा पैसे कमाने के लालच में आरोपी तैयार हो गया। शुरुआत में उसने कम मात्रा में डोडा-चूरा पहुंचाया, लेकिन भरोसा बढ़ने पर बड़ी खेप भी उसी के जरिए भेजी जाने लगी। पुलिस का कहना है कि आरोपी को पता था कि कंटेनर में अवैध मादक पदार्थ रखा गया है, फिर भी वह अतिरिक्त कमाई के लिए यह काम करता रहा। कम शक होने की वजह से चुना डाक-पार्सल कंटेनर आईजीपी ने बताया – तस्करों ने डाक-पार्सल और कूरियर ले जाने वाले कंटेनरों को इसलिए चुना क्योंकि इन पर आमतौर पर कम शक होता है। ऐसे वाहन रोज अलग-अलग शहरों और राज्यों में पार्सल पहुंचाते हैं, इसलिए उनकी आवाजाही सामान्य मानी जाती है। इसी का फायदा उठाकर पार्सलों के बीच डोडा-चूरा छिपाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस तरीके से पहले कितनी बार मादक पदार्थ की खेप भेजी गई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, डोडा-चूरा कहां से कंटेनर में रखा गया और इसे कहां पहुंचाया जाना था। कंटेनर मालिक समेत पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
