झालावाड़ में आज विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। झालावाड़ जिले में साल में दो बार दशहरा मनाने की यह एक अनूठी परंपरा है। यहां साल में दो बार नवरात्रि का पर्व होता है, जिसके चलते रावण दहन भी दो बार किया जाता है। पहला दहन शारदीय नवरात्रि के बाद आने वाली विजयादशमी पर होता है, और दूसरा चैत्र नवरात्रि के बाद आने वाली दशमी पर (जो कि वर्तमान में है)। झालावाड़ में चैत्र मास में दशहरा महोत्सव की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे इसमें लोग जुड़ते गए और इसकी भव्यता बढ़ती गई। प्रारंभ में केवल रामायण पाठ होता था, लेकिन बाद में इसे दशहरा पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। आज, 28 मार्च को, झालावाड़ में 35 फीट के रावण के पुतले का दहन होगा। इससे पहले भगवान राम का विजय जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस शहर के विभिन्न इलाकों से होते हुए राड़ी के बालाजी मंदिर पहुंचेगा। शोभायात्रा के राड़ी के बालाजी पहुंचने के बाद, राम का पात्र निभाने वाले व्यक्ति द्वारा रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। पुराने समय से चली आ रही परम्परा
झालावाड़ मे राड़ी के बालाजी मन्दिर समिति की ओर से यह परंपरा चली आ रही है, जहा साल भर मे रावण के पुतले को 2 बार जलाया जाता। आज रावण को चेत्र पुर्णिमा की दशमी के अवसर पर यहां परंपरा अनुसार रावण का दहन किया जाएगा। इसको देखने के लिए पूरा शहर उमड़ता है, साथ ही यहां राड़ी के बालाजी पर 9 दिन तक यहां धार्मिक आयोजन भी होते है। आज दसवें दिन शहर में शोभायात्रा निकाली जाती है। झालावाड़ में 35 फिट रावण बनाया गया है जो सर हिलाएगा तलवार चलाएगा 10 सिर वाले रावण इस बार खास आकर्षण का केंद्र है। मंदिर समिति के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि करीब 75 सालों से दो बार रावण दहन की यह परंपरा चली आ रही है। जिले के सुनेल और कस्बा गंगधार में भी रावण दहन का कार्यक्रम होगा।

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