झालावाड़ में नगर निकाय चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। झालावाड़ नगर परिषद में कुल 177 आवेदन आए थे, जिनमें 54 नामांकन खारिज हुए और 6 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिया। इसके बाद 117 प्रत्याशी चुनाव मैदान में बचे हैं। वहीं, खानपुर नगरपालिका में 127 आवेदन आए, जिनमें 54 नामांकन खारिज हुए और 5 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिया। अब यहां 68 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। नाम वापसी का समय गुरुवार दोपहर 3 बजे समाप्त हुआ, जिसके बाद निर्वाचन विभाग ने अंतिम प्रत्याशी सूची जारी कर दी। 43 वार्डों में अब सीधा मुकाबला झालावाड़ नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं, लेकिन दो वार्डों में प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाने के कारण अब 43 वार्डों में चुनाव होगा। वार्ड 5 और 7 में कांग्रेस और भाजपा के एक-एक प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए हैं। बाकी वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी मैदान में हैं। इससे कई वार्डों में मुकाबला रोचक और कांटे का होने के आसार हैं। नाम वापसी के अंतिम दिन बागियों को मनाने की कोशिश नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतरे बागियों और निर्दलीय प्रत्याशियों को मनाने की रही। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के अंतिम दिन भी दोनों दलों की ओर से ऐसे प्रत्याशियों को मनाने की कोशिशें सुबह तक जारी रहीं। प्रत्याशियों का सुबह से ही आना-जाना लगा रहा और दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लेने का सिलसिला चला। निर्दलीय और आप प्रत्याशी बिगाड़ेंगे समीकरण कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों के सामने चुनौती पेश कर सकते हैं। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में डटे रहने से दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक पर असर पड़ने की संभावना है। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी कई वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। आप के प्रत्याशी मैदान में रहने से भाजपा-कांग्रेस के पारंपरिक मुकाबले में वोटों के बंटवारे की स्थिति बन सकती है। खानपुर में पहली बार निकाय चुनाव जिले के खानपुर में पहली बार निकाय चुनाव हो रहे हैं। यहां कुल 127 नामांकन आए थे। जांच और नाम वापसी के बाद 68 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं। खानपुर में भी मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है, लेकिन कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों के डटे रहने से चुनावी समीकरण दिलचस्प हो गए हैं। पहली बार होने वाले निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ की भी अहम भूमिका रहने की संभावना है। 4 सितंबर से तेज होगा प्रचार नाम वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद अब प्रत्याशियों की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो गई है। 4 सितंबर को प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। इसके साथ ही चुनाव प्रचार भी जोर पकड़ने की उम्मीद है। भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में जनसंपर्क, बैठकों और मतदाताओं को साधने का दौर तेज होगा। राजनीतिक दलों के साथ-साथ अब सभी की नजर उन वार्डों पर रहेगी, जहां बागी, निर्दलीय और आप प्रत्याशी मुकाबले को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। नामांकन की स्थिति