हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल सहित 8 आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 5 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। श्रीमाली ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा- यह मामला आम जनता को घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी सरकारी योजना से जुड़ा है। जनहित और राज्य को हुए करोड़ों के आर्थिक नुकसान और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को जमानत की राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि अभियुक्तों के लंबे समय से हिरासत में होने के कारण ट्रायल कोर्ट को मामले में आरोप तय कर तेजी से सुनवाई करने के निर्देश भी अदालत ने दिए। महेश जोशी-सुबोध अग्रवाल सहित इनकी याचिका खारिज अदालत ने महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल, बिचौलिए संजय बड़ाया, पूर्व मुख्य अभियंता दिलीप कुमार गौड़, के.डी. गुप्ता, पूर्व अधीक्षण अभियंता एम.पी. सोनी और निजी व्यक्ति मुकेश पाठक की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। वहीं सह-आरोपी संजीव कुमार गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी। महेश जोशी पूरे षड्यंत्र के केंद्र में थे सुनवाई के दौरान एसीबी ने कोर्ट में कहा था कि पूर्व मंत्री महेश जोशी इस पूरे आपराधिक षड्यंत्र के केंद्र में थे। उन पर बिचौलिए संजय बड़ाया के माध्यम से ठेकेदार फर्मों (मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल और मैसर्स गणपति ट्यूबवेल) से रिश्वत की भारी राशि लेने और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों की शिकायतें मिलने के बावजूद टेंडरों को जारी रखने का आरोप है। पूर्व आइएएस सुबोध अग्रवाल वित्त समिति के अध्यक्ष के रूप में दोहरी भूमिका में रहते हुए बेईमानी से फर्जीवाड़े को अनदेखा करते रहे। इॅरकान कंपनी द्वारा 22 मार्च 2023 और 7 जून 2023 को दिए गए आधिकारिक ई-मेल के जरिए यह स्पष्ट किए जाने के बाद भी कि प्रमाण पत्र फर्जी हैं। आरोपी कंपनियों को अनुचित भुगतान जारी रखा गया। पूर्व मंत्री ने कहा- शिकायत पर कंपनियों को किया ब्लैक लिस्ट सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों की ओर से कहा गया कि शिकायत मिलने के बाद और एफआईआर दर्ज होने से पहले ही विभाग ने कंपनियों का भुगतान रोकते हुए उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया था। राज्यपाल की मंजूरी से पहले जांच शुरू कर दी महेश जोशी की ओर से कहा गया कि मुझे गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं थी। क्योंकि ईडी की गिरफ्तारी के बाद सात महीने तक हिरासत में रहने के दौरान एसीबी ने न मुझसे कोई अनुसंधान किया था और न ही गिरफ्तार किया था। एसीबी ने कानूनी रूप से अनिवार्य राज्यपाल की मंजूरी मिलने से पहले ही प्रारंभिक अनुसंधान शुरू कर दिया। एसीबी के पास किसी से भी डिमांड करने का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। फर्जी प्रमाण पत्र का उपयोग महेश जोशी के जलदाय मंत्री और सुबोध अग्रवाल के एसीएस बनने के पहले से ही हो रहा था। विभाग ने जल जीवन मिशन के कुल 140 टेंडर किए थे। इनमें से मंत्री महेश जोशी और एसीएस सुबोध अग्रवाल के कार्यकाल में मात्र चार टेंडर हुए थे।
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