ओसियां विधायक भैराराम सियोल ने कहा- वर्तमान में शहरी क्षेत्रों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लगभग 55 लीटर पानी का मानक तय है, जो ग्रामीण जीवनशैली और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था को देखते हुए उचित नहीं है। गांवों में बड़ी संख्या में गाय, भैंस, ऊंट, भेड़ और बकरियां होने के कारण पानी की आवश्यकता अधिक होती है, इसलिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इस भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए। विधायक ने कहा- ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तियों की संख्या के आधार पर पेयजल की सप्लाई हो रही है, भैंस और ऊंट जैसे पशुओं को इसमें नहीं गिना जा रहा है। साल 2018 से 2023 के बीच जलापूर्ति परियोजनाओं में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ। कई स्थानों पर पानी की टंकियां तो बना दी गईं, लेकिन उन्हें पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ने और गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक बजट और कार्य नहीं किए गए। इसका खामियाजा आज ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ रहा है। विधायक भैराराम सियोल बुधवार को जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में पहुंचे थे। जिला प्रमुख लीला मदेरणा की अध्यक्षता में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में बैठक का आयोजन किया गया। बैठक से जुड़ी 4 अहम बातें… 1. पिछली बैठक की समीक्षा: बैठक में सबसे पहले 16 जनवरी 2026 को आयोजित पिछली साधारण सभा की कार्यवाही की अनुपालना एवं अनुमोदन पर विचार किया गया। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था और सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। 2. पानी-बिजली संकट पर जनप्रतिनिधियों की चिंता: बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और बिजली आपूर्ति का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। जनप्रतिनिधियों ने पानी की कमी, बिजली की अनियमित आपूर्ति और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित जल वितरण मानकों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। भोपालगढ़ विधायक गीता बरवाड़ ने अपने क्षेत्र में पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं होने का मुद्दा उठाया, जिस पर जलदाय विभाग के अधिकारियों ने इंदिरा गांधी नहर के क्लोजर के कारण पेयजल की कमी होने की बात कही। टैंकरों से पानी की आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन दिया। 3. मीटिंग में काम के लिए कहना पड़ रहा है: उप जिलाप्रमुख विक्रम बिश्नोई ने नाराजगी जताते हुए कहा- विधायकों को ही मीटिंग में काम के लिए कहना पड़ रहा है, यह सोचने वाली बात है। अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनते हैं। 4. जेईएन को जनप्रतिनिधियों ने डांटा: विधायक अर्जुन लाल गर्ग ने भी बिजली के खभों की शिफ्टिंग और पेयजल से जुड़ा मुद्दा उठाया। बैठक के दौरान शेरगढ़ इलाके में पानी की स्थिति को लेकर जेईएन (JEhn) ने सही से जवाब नहीं देने पर जिला प्रमुख सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई।
सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं ओसियां विधायक भैराराम सियोल ने मीडिया से बात करते हुए कहा- प्रदेश में वर्तमान जल संकट पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में हुई अनियमितताओं का परिणाम है। हाल ही में आई भीषण आंधी और प्राकृतिक आपदा के कारण बड़ी संख्या में बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं। विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक-दो घंटे के भीतर लगभग 3,500 से 4,000 बिजली के पोल गिर गए, जिनमें 33 केवी और 11 केवी की लाइनें भी शामिल थीं। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदा के लिए किसी भी सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। डिस्कॉम की टीमें युद्धस्तर पर बिजली व्यवस्था बहाल करने में जुटी हैं। यदि संसाधनों के वितरण में यह अंतर (शहर और गांव के बीच) बना रहा तो गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ सकता है। बैठक में इस विषय पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जल आवंटन मानकों की पुनर्समीक्षा की मांग सरकार के समक्ष रखने का निर्णय लिया गया, ताकि गांव और शहर के बीच संसाधनों के वितरण में समानता सुनिश्चित की जा सके।
