गुरदासपुर के थाना दोरंगला के अधीन आते गांव गंजी के सरकारी प्राइमरी स्कूल में एक टीचर ने 5वीं कक्षा के 9 वर्षीय मासूम बच्चे को प्लास्टिक की विकटों से इस कदर बेरहमी से पीटा कि बच्चे के पूरे शरीर पर चोट के गहरे निशान पड़ गए।
मामले का सच तब सामने आया जब कपड़े बदलते बच्चे के जिस्म पर मां की नजर पड़ी। अब परिवार ने बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग को मामले की शिकायत सौंपी है। जिसके बाद जांच शुरू की गई है। फिल्हाल बच्चे को पीटने वाला अध्यापक फरार है। सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है मासूम
जानकारी के मुताबिक 9 साल का मासूम गुरदासपुर के कस्बा दोरांगला के गांव गंजी के सरकारी प्राइमरी स्कूल में 5वीं का छात्र है। स्कूल के बाहर बच्चे शरारत कर रहे थे। इसी दौरान स्कूल की एक अध्यापिका ने उन्हे शरारत करते देख लिया। अध्यापिका ने इस बाबत संदीप नामक अध्यापक को शिकायत दी तो संदीप ने बच्चे को बेरहमी से पीट दिया। कपड़े बदलते समय मां के सामने आया सच
पीड़ित बच्चे की माता जसमीत ने बताया कि बच्चा स्कूल से आने के बाद काफी डरा और सहमा हुआ था। उसने डर के मारे घर में किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन रात को जब वो बच्चे के कपड़े बदलने लगी, तो उसकी पीठ और शरीर पर पड़े नीले निशानों को देखकर वह दंग रह गई और भावुक हो गई।
सख्ती से पूछने पर बच्चे ने बताई सारी बात
जसमीत ने बताया कि बच्चा कुछ भी बताने को तैयार नहीं था और बार-बार कह रहा था कि उसने कुछ नहीं किया। लेकिन, जब बच्चे से सख्ती से पूछा गया, तो उसने रोते हुए बताया कि स्कूल में संदीप नाम के अध्यापक ने उसे प्लास्टिक की विकटों से बुरी तरह पीटा है क्योंकि वह कथित तौर पर शरारत कर रहा था। बच्चे को स्कूल से निकालने की दी धमकी
जसमीत ने बताया कि बच्चा इसलिए पिटाई की बात नहीं बता रहा था क्योंकि अध्यापक ने उसे किसी को बताने पर स्कूल से नाम काटने की धमकी दी थी। जसमीत ने कहा कि इससे पहले भी उनके बेटे की अध्यापक द्वारा पिटाई के दौरान आंख और कान पर चोट लगी थी। तब उस अध्यापक ने माफी मांग कर कार्रवाई ना करवाने को कहा था और उन्होंने मान भी लिया। लेकिन, अब वे मांग करते हैं कि इस अध्यापक को डिसमिस किया जाए।
अध्यापक स्कूल से हुआ गायब
घटना का पता चलते ही जब गांव के गणमान्य व्यक्ति और बच्चे के परिजन स्कूल पहुंचे, तो आरोपी अध्यापक वहां से नदारद मिला। परिजनों और समाजसेवी सचिन ने सवाल उठाया कि क्या शरारत करने की सजा इतनी बेरहमी से देना जायज है। उन्होंने कहा कि शरारत पर परिवार को बुलाना चाहिए था। खुद सजा देने का हक अध्यापक को नहीं है। उस अध्यापक पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए। बाल भलाई अधिकारियों के पास पहुंचा मामला
पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए बच्चे को साथ लेकर जिला बाल भलाई कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी के पास पहुंचा। बाल भलाई अधिकारी रतन लाल ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी तुरंत जांच करवाई जाएगी। बच्चे को पीटने वाले अध्यापक पर कार्रवाई की जाएगी और स्कूल प्रबंधन से भी इस बाबत जवाब लिया जाएगा।़ डिप्टी डीइओ करेंगे मामले की जांच
जिला शिक्षा अधिकारी परमजीत कौर ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। विभाग इसकी पूरी जांच करवाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित अध्यापक के खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कल ही डिप्टी डीईओ को मामले की जांच के लिए स्कूल भेजा जाएगा।
