सिविल अस्पताल खन्ना में डिलीवरी (प्रसव) के बाद 24 वर्षीय महिला की हालत बिगड़ने का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन, संबंधित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के दोनों गुर्दों (किडनी) ने काम करना बंद कर दिया है और उसे लुधियाना के एक निजी अस्पताल में वेंटिलेटर/डायलिसिस सपोर्ट पर भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। ऑपरेशन के बाद यूरिन बंद, डॉक्टर नहीं मिला पीड़िता की पहचान फतेहगढ़ न्युआं निवासी गार्गी साहनी (24) के रूप में हुई है। मूल रूप से दिल्ली निवासी गार्गी के भाई मयंक साहनी ने बताया कि गार्गी को 17 सितंबर को खन्ना सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टर गरिमा अग्रवाल ने सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी कराई। मयंक का आरोप है कि 18 सितंबर को यूरिन बैग हटाने के बाद महिला का यूरिन आना पूरी तरह बंद हो गया और शरीर पीला पड़ने लगा। परिजनों द्वारा बार-बार सूचित करने के बावजूद स्टाफ ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताकर टाल दिया और बताया कि संबंधित डॉक्टर छुट्टी पर हैं। 19 सितंबर तक अनदेखी, 20 सितंबर को किया रेफर पारिवारिक सदस्य रमनजोत कौर के अनुसार, 18 और 19 सितंबर को स्थिति बिगड़ने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। 20 सितंबर की सुबह जब हालत अत्यधिक बिगड़ गई, तब आपातकालीन स्थिति में डॉक्टर को बुलाया गया। स्थिति को गंभीर देखते हुए मरीज को लुधियाना रेफर कर दिया गया। लुधियाना के निजी अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला के गुर्दे फेल हो चुके हैं और तुरंत डायलिसिस शुरू की गई। एसएमओ से शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग परिजनों ने अस्पताल के एसएमओ (SMO) को लिखित शिकायत देकर दोषी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही सही इलाज मिल जाता तो यह नौबत न आती। उधर, एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन ने बताया कि परिजनों के आरोपों की जांच की जा रही है और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार आगे की उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।