कोटपूतली नगर परिषद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। यह निकाय सभापति पद के लिए अनारक्षित ओपन वर्ग के लिए आरक्षित है। इस सूची में कुल 60 वार्डों में से 53 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं, जबकि 7 वार्डों को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इस तरह करीब 88.3 फीसदी सीटों पर उम्मीदवार तय हो चुके हैं । पावटा-प्रागपुरा नगर पालिका के अध्यक्ष पद को महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। पावटा-प्रागपुरा नगर पालिका में कुल 45 वार्ड हैं। नगर परिषद कोटपूतली के लिए भाजपा प्रत्याशियों की सूची 53 सीटों पर प्रत्याशी घोषित, कुछ वार्डों में अब भी पेंच कोटपूतली नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 53 वार्डों में प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है, जबकि वार्ड 1, 7, 9, 25, 31 और 42 समेत कुछ सीटों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। टिकट के लिए दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इन सीटों को होल्ड रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर आरक्षित और महिला आरक्षित सीटों पर अलग-अलग दावेदारों के बीच सहमति बनाने की कोशिश के कारण घोषणा में देरी की संभावना है। महिला प्रत्याशियों को 39.6 फीसदी हिस्सेदारी घोषित 53 प्रत्याशियों में 21 महिलाएं हैं। यानी घोषित सीटों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 39.6 फीसदी है। यह आंकड़ा महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला प्रत्याशियों में सुमन यादव, मेवा देवी, ममता यादव, अनोफ देवी, विमला देवी, सुनीता देवी, शिखा सैनी, सरोज देवी, लक्ष्मी देवी, सुमन गुर्जर, रचना सैनी, हीरा देवी, कमलेश देवी, मनु चौधरी और पुष्पा देवी समेत अन्य नाम शामिल हैं। वहीं आरक्षित वर्ग से ममता और गुडी देवी जैसे नाम भी सूची में हैं। घोषित उम्मीदवारों में 32 पुरुष हैं, जिनकी हिस्सेदारी करीब 60.4 फीसदी है। इस तरह टिकट वितरण में महिलाओं को एक-तिहाई के आंकड़े से अधिक प्रतिनिधित्व मिलता दिखाई दे रहा है। सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश पूरी सूची में टिकट वितरण में सैनी, यादव और गुर्जर समुदायों को प्रमुखता देने के साथ अन्य सामाजिक वर्गों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। सैनी समाज के बड़ी संख्या में उम्मीदवार, यादव और गुर्जर चेहरों की मौजूदगी तथा वैश्य, एससी और एसटी वर्ग को मिले प्रतिनिधित्व से पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच चुनावी संतुलन साधने का प्रयास किया है। अब शेष वार्डों में टिकट की घोषणा और उसके बाद संभावित बगावत या निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से कोटपूतली के चुनावी समीकरण और स्पष्ट होंगे। घोषित प्रत्याशियों के सामने भी अपने-अपने वार्ड में संगठन, समर्थकों और स्थानीय मतदाताओं को एकजुट करने की चुनौती रहेगी।
