बाड़मेर में कुत्तों से बचाकर दो हिरणों को ग्रामीण घर ले गए। प्राथमिक इलाज करने के साथ ही रातभर देखभाल की। सूचना के बाद भी वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। 10 घंटे बाद थ्री-व्हीलर टेम्पो भेज दिया। सुरक्षा का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने विरोध किया। इस पर ड्राइवर ने कहा- मैं किराए से आया हूं, वन विभाग का कर्मचारी नहीं हूं। इसके बाद टेम्पो से ही घायल हिरणों को जुगाड़ कर हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है और हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। मामला रीको थाना क्षेत्र के गालाबेरी कुंभावास में शनिवार रात करीब 10 बजे का है। पहले देखिए, घटना से जुड़ी ये फोटो … अब पढ़िए, सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम … 1. रात में हिरणों पर कुत्तों का हमला और बचाव की घटना
गालाबेरी कुंभावास के रहने वाले पपुराम जाणी ने बताया – साथी सवाईराम दोनों रात के समय बाइक से जा रहा था। तभी देखा कि कुछ कुत्तों ने दो हिरणों को घेर रखा था और उन पर हमला कर रहे थे, यहां तक कि कुत्ते उन्हें नोच रहे थे। यह देखकर दोनों ने तुरंत कुत्तों को भगाकर हिरणों को बचाया। 2. घायल हिरणों को घर लाना और प्राथमिक इलाज
पपुराम जाणी ने बताया- इसके बाद मौके पर विजय खोथ को गाड़ी लेकर बुलाया और घायल हिरणों को वाहन में डालकर अपने घर ले आए। इस दौरान वन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन विभाग ने गाड़ी नहीं होने की बात कहकर सुबह आने को कहा। इसके बाद ग्रामीणों ने मेरे घर पर दोनों हिरणों का अपने स्तर पर इलाज किया और पूरी रात उनकी देखभाल की। 3. वन विभाग को सूचना और ग्रामीणों की व्यवस्था
सुबह होने पर वन विभाग के उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम के बजाय एक टेम्पो और एक निजी ड्राइवर मौके पर पहुंचा। ग्रामीणों ने चिंता जताई कि घायल हिरणों को ऐसे वाहन में ले जाने से वे हॉस्पिटल पहुंचने से पहले ही मर सकते हैं। 4. थ्री व्हीलर टेम्पो में ‘देशी जुगाड़’ से रेस्क्यू
ग्रामीणों की आपत्ति के बावजूद वन विभाग द्वारा भेजे गए थ्री व्हीलर टेम्पो में घायल हिरणों को बैठाने के लिए जुगाड़ किया गया। सीट के नीचे रखा गया और सीट को उलट दिया गया। एक तरफ गेट और दूसरी तरफ सब्जी रखने वाला कैरेट लगाकर रस्सियों से बांधकर व्यवस्था की गई, जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल के लिए रवाना किया गया। 5. वन विभाग का बयान और इलाज की स्थिति
वन संरक्षक तेजाराम ने बताया – शनिवार रात को सूचना मिली थी कि कुत्तों के हमले में हिरण घायल हुए हैं। रात को गाड़ी नहीं होने के कारण मौके पर नहीं पहुंच पाए थे। सुबह दोनों हिरणों का रेस्क्यू कर लिया गया और फिलहाल उनका इलाज सिणधरी हॉस्पिटल में चल रहा है। गाड़ियों की सीमित उपलब्धता के कारण तुरंत हर जगह पहुंचना संभव नहीं हो पाता। — हिरण से जुड़ी से खबर भी पढ़ें … हिरण से बिछड़ने पर रोने लगा परिवार, VIDEO:डेढ़ साल तक अपने बच्चे की तरह पाला; बोतल से दूध पिलाते, कमरे में रखते बीकानेर में एक किसान परिवार ने हिरण को बच्चे की तरह पाला। डेढ़ साल तक उसका ख्याल रखा। विदाई के दौरान किसान की पत्नी से लेकर बच्चे तक फूट-फूटकर रोने लगे। पूरी खबर पढ़ें
