डिब्रूगढ़ जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े एक आपराधिक मामले में मंगलवार को अमृतसर की सेशन कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। इस दौरान पुलिस द्वारा लगाई गई धारा 307 (हत्या के प्रयास) को लेकर अभियोजन (स्टेट) और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है। अमृतपाल सिंह के वकील रीतू राज सिंह संधू ने सुनवाई के बाद मीडिया को बताया कि उन्होंने कोर्ट में पहले ही एक डिस्चार्ज एप्लीकेशन (मामले से बरी करने की अर्जी) दाखिल की हुई है। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह है कि अमृतपाल सिंह पर लगाई गई धाराएं, विशेषकर हत्या के प्रयास की धारा 307, कानूनन गलत हैं और तथ्यों के विपरीत हैं। सरकारी वकीलों ने इन धाराओं को जायज ठहराते हुए इनका समर्थन किया। वीडियो साक्ष्य: “शांतिपूर्ण प्रदर्शन” का दावा बचाव पक्ष ने अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए अदालत में दो महत्वपूर्ण वीडियो पेश किए और उनकी फोरेंसिक जांच की मांग की। दोनों वीडियों में क्या– ‘चोट की गंभीरता’ पर उठाए सवाल अमृतपाल सिंह के कानूनी दल ने तर्क दिया कि यदि पुलिस अधिकारी को ऐसी गंभीर चोट आई होती जिससे उनकी जान को खतरा होता (जैसा कि धारा 307 के तहत दावा किया गया है), तो उन्हें मौके से तुरंत अस्पताल ले जाया जाता। लेकिन वीडियो में उनकी स्थिति सामान्य दिख रही है, जो पुलिस के दावों पर सवालिया निशान लगाती है। “साजिश के तहत फंसाने” का आरोप एडवोकेट संधू ने अदालत के बाहर आरोप लगाया कि अमृतपाल सिंह को लंबी कानूनी प्रक्रिया और सख्त धाराओं में उलझाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट निष्पक्ष फैसला लेगा। 14 मई को अगली सुनवाई फिलहाल अमृतपाल सिंह डिब्रूगढ़ केंद्रीय कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। अब सबकी नजरें 14 मई को होने वाली सुनवाई पर हैं, जहाँ कोर्ट बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए वीडियो और डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर आगे की कार्यवाही करेगा।
