Home Loan EMI: घर खरीदना जिंदगी के बड़े फैसलों में से एक है। लेकिन यहां एक गलती अक्सर हो जाती है। लोग किराए और होम लोन की EMI को आमने-सामने रखकर फैसला करने लगते हैं। अगर ईएमआई ज्यादा है, तो किराए को सस्ता मान लिया जाता है और अगर ईएमआई किराए के करीब है तो घर खरीदना बेहतर समझ लिया जाता है। असल हिसाब इससे कहीं बड़ा है। घर खरीदते समय डाउन पेमेंट, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, लोन का ब्याज, मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स और मरम्मत जैसे खर्च भी जुड़ते हैं। दूसरी तरफ किराए पर रहने में जमा राशि, ब्रोकरेज, शिफ्टिंग खर्च और हर साल बढ़ता किराया जेब पर असर डालता है।