डूंगरपुर। जिले के धंबोला क्षेत्र का लिखीबड़ी गांव रविवार को उस दर्द का गवाह बना, जिसे कोई कभी नहीं सहन कर सकता। जिस आंगन में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहीं शाम होते-होते तीन भाई-बहनों की अर्थियां एक साथ उठीं। इस हृदयविदारक दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर दिया। जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। बच्चों के पिता बाबूलाल डामोर अपने जिगर के टुकड़ों को खोने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जबकि उन्हें सांत्वना देने पहुंचे लोग भी खुद आंसू नहीं रोक पाए।
