भारत में कॉरपोरेट सेक्टर लंबे समय से युवा टैलेंट और तेज ग्रोथ को प्राथमिकता देता रहा है। तकनीक आधारित कंपनियों, स्टार्टअप्स और कॉस्ट कटिंग मॉडल ने कर्मचारियों की नियुक्ति की सोच को बदला है। इसी बदलाव के बीच अब एक नई और चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है कि 40 की उम्र पार करते ही कई प्रोफेशनल्स के लिए करियर की रफ्तार धीमी पड़ने लगती है। इतने समय का अनुभव जो कभी ताकत माना जाता था, अब कई मामलों में लागत की चुनौती के रूप में देखा जाने लगा है।
