पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी जमीनों की बिक्री को लेकर घमासान मच गया है। पूर्व डिप्टी CM व कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा ने सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को टारगेट किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में 3 हजार एकड़ सरकारी जमीन को बेचने की तैयारी का दावा किया। रंधावा ने सोशल मीडिया पर लिखा- आप सभी को सूचित किया जाता है कि जिस पंजाब ने भारत देश की जमीन और सीमाओं की रक्षा की है, आज वही पंजाब धीरे-धीरे बेचा जा रहा है। पंजाब को खरीदने के इच्छुक लोग मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल से संपर्क कर सकते हैं। सुखजिंदर रंधावा ने अपनी पोस्ट में पंजाब फॉर सेल लिखा है। उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ एक मीडिया रिपोर्ट डाली है। जिसमें दावा किया गया है कि जमीन बिक्री के लिए चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा की अगुआई में मीटिंग हो चुकी है। पंजाब सरकार वित्तीय संकट से उभरने के लिए राज्य भर की 15 अहम संपत्तियां बेचने का फैसला ले चुकी है। जिनकी कीमत तीन हजार करोड़ के आसपास है। सरकार उन संपत्तियों को पहले फेज में बेचने जा रही है जो कि वर्तमान में उपयोग में नहीं हैं। सरकार OUVGL स्कीम के तहत खाली पड़ी संपत्तियों को बेच रही है। सरकार 5 बड़े शहरों पटियाला, जालंधर, लुधियाना, बठिंडा, अमृतसर में खाली पड़ी जमीनों को सबसे पहले बेचेगी। इन शहरों में ही सरकार को जमीन बेचने से ज्यादा राजस्व प्राप्त होगा। नवजोत कौर सिद्धू ने पूछा- जमीनें क्यों बेच रहे CM रंधावा के अलावा पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की पत्नी कांग्रेस नेता डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने भी सीएम भगवंत मान से सवाल पूछा कि वह सरकारी जमीनें क्यों बेच रहे हैं। नवजोत कौर ने सोशल मीडिया पर पूछा- मुख्यमंत्री भगवंत मान जी, क्या आप बता सकते हैं कि आप पंजाब की जमीन क्यों बेच रहे हैं? क्या आपको शराब और खनन से पर्याप्त पैसा नहीं मिल रहा है? सरकार ने लुधियाना की 27 संपत्तियों की सूची की तैयार
वित्तीय संकट से बचने के लिए पंजाब सरकार ने ऑप्टीमम यूटिलाइजेशन ऑफ वैकेंट गवर्नमेंट लैंड (OUVGL) स्कीम के तहत लुधियाना की 27 संपत्तियों की सूची तैयार की है। हालांकि उस सूची में से अभी कुछ प्रॉपर्टीज ऐसी हैं, जिनको बेचने में सरकार को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब सरकार इन प्रॉपर्टीज को बेचने के लिए अक्तूबर माह में हुई बैठक में चर्चा कर चुकी है। इसका खुलासा आरटीआई के माध्यम से ली गई सूचना से भी हो चुका है।