सामाजिक पेंशन और छात्रवृत्ति की पेंडेंसी से लगातार जूझ रहे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग अब फील गुड फैक्टर पर काम करेगा। यानी कि जनता को संतुष्ट करने की दिशा में वर्किंग देखने को मिलेगी। विभाग ने इसकी तैयारियां कर ली हैं। पैमानों में बदलाव की शुरुआत संपर्क पोर्टल से होगी। इसमें अब 45 दिनों के बाद शिकायतों के निस्तारण नहीं होने पर अधिकारी या कर्मचारी व्यक्तिगत तौर पर आवेदक से संपर्क करके समस्या के समाधान पर बात करेंगे। हालांकि इससे पहले 44 दिनों में विभागीय स्तर पर समस्या का समाधान करने की रूटीन वर्किंग रहेगी। उधर ये भी तय हो गया है कि अधिकारीगण प्रकरणों में अस्पष्ट जवाब नहीं देंगे। अधिकारियों को स्पष्ट जवाब लिखना होगा। कमियां बतानी होंगी और कमियां दूर करने के संबंध में भी कार्य करना होगा। ऐसा करके आवेदक या संबंधित को ये अहसास कराया जाएगा कि अधिकारी या सरकार उनके प्रति गंभीर है। उधर ये भी तय हुआ कि इस मामले में प्रभारी अधिकारी हर हफ्ते रिव्यू बैठक करेंगे। एसीएस से लेकर विभागीय डायरेक्टर भी 1 से 3 माह में लगातार रिव्यू बैठकें करेंगे, इसमें पेंडेंसी मुख्य मुद्दा रहेगा। पेंशन सहित कई समस्याओं की पेंडेंसी वृद्धजन पेंशन, नशामुक्ति, पालनहार, कन्यादान, अंतरजातीय विवाह, एट्रोसिटी, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं में लंबित प्रकरण हमेशा ही बने रहते हैं। जीरो पेंडेंसी कभी देखने को ही नहीं मिली। विभाग की इस दिशा में पहली बैठक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता निदेशक आशीष मोदी ने गुरुवार को इस संबंध में संपर्क पोर्टल के मुद्दे पर बैठक ली। जिसमें उन्होंने समस्याओं की निरंतर मॉनिटरिंग करने, परिवादी की समस्या का समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। साथ ही आगाह भी किया कि समस्याओं के निस्तारण में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में अतिरिक्त निदेशक जेपी बैरवा, अतिरिक्त निदेशक रीना शर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।