गेहूं की पिछेती किस्मों की बुवाई दिसंबर के पहले पखवाड़े तक की जा सकती है। इनमें राज 4238, एचडी 2236, जीडब्ल्यू 173, जीडब्ल्यू 273, राज 3765, राज 3077, राज 3777, एचडी 2932, एमपी 1243, एचआई 8498 (काठिया) व एचआई 8713 की बुवाई करें। हवा में ज्यादा नमी के कारण आलू तथा टमाटर में झूलसा रोग आने की आशंका है। इसलिए फसल की नियमित रूप से निगरानी करें। लक्ष्ण दिखाई देने पर डाईथेन-एम-45 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। गेहूं की देरी से बुवाई पर यह ध्यान दे गेहूं की देरी से बुवाई करने पर बीज की मात्रा 125 किलो प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें। रबी फसलों में समय पर और संतुलित सिंचाई करना जरूरी है। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि खेत में पानी ज्यादा न भरे। गेहूं, जौ में दीमक का रोगोपचार गेहूं और जौ की खड़ी फसल में दीमक नियंत्रण के लिए 4 लीटर क्लोरपाइरीफोस 20% ईसी को 80 से 100 किलोग्राम मिट्टी में मिलाकर एक हेक्टेयर में समान रूप से फैलाएं और हल्की सिंचाई करें। जीरे में 7-8 दिन में सिंचाई करें जीरा की फसल में अच्छे अंकुरण के लिए 7-8 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करते रहें। वर्तमान मौसम परस्थितियों में जौ की फसल में प्रथम सिंचाई के 10-12 दिन के अंदर कम से कम एक बार निराई-गुड़ाई कर खरपतवार अवश्य निकाल दें। गेहूं में सिंचाई का तरीका गेहूं में प्रथम सिंचाई फसल बोने के 20-25 दिन पर शीर्ष जड़ जमने के समय करें। नाइट्रोजन उर्वरक की एक चौथाई मात्रा (55-66%) पहली सिंचाई के समय देना चाहिए। चने में कीट नियंत्रण ऐसे करें चने की फसल में कटवर्म कीट के प्रकोप के नियंत्रण के लिए क्विनालफॉस 25 ईसी 1 लीटर प्रति हेक्टेयर या फेनवेलरेट 0.4% पावडर 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। आम के तनों पर मिलीबग का ध्यान रखें इस मौसम में मिलीबग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ेंगे, इसे रोकने के लिए किसान जमीन से 0.5 मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों तरफ 25 से 30 सेमी चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेटें। तने के आसपास की मिट्टी की खुदाई करें, इससे उनके अंडे नष्ट हो जाएंगे। गोभीवर्गीय सब्जियों की देखभाल इस तरह करें फूलगोभी, बंद गोभी, नोलखोल, ब्रोकली की फसल के परिपक्व पौधों की रोपाई उठी हुई क्यारियों में की जा सकती है। गोभीवर्गीय सब्जियों में पत्ती खाने वाले कीटों की निरंतर निगरानी करते रहें। संख्या ज्यादा हो तो बीटी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी या स्पेनोसेड दवा 1 एमएल प्रति 3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
