जयपुर में मंगलवार को विश्व ओजोन दिवस 2025 के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में ओजोन परत की सुरक्षा को लेकर जागरूकता संदेश दिए गए और बताया गया कि इसका संरक्षण केवल वैज्ञानिकों की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने कहा- इस साल की थीम ‘विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक’ यह दर्शाती है कि वैज्ञानिक चेतावनियों को नीतियों और ठोस कदमों में बदलना समय की मांग है। समारोह में ओजोन परत को बचाने के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को साझा किया गया। इसमें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के 35 साल पूरे होने पर उसकी उपलब्धियों, इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान, मिशन लाइफ, पंचामृत संकल्प और हरियालो राजस्थान महाभियान जैसी पहलों का जिक्र हुआ। साथ ही विशेषज्ञों ने बताया कि अब ओजोन परत धीरे-धीरे रिकवर हो रही है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सामूहिक जिम्मेदारी और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग आनंद कुमार ने कहा- ओजोन परत हमें सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से बचाती है। 1987 में लाए गए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की राह बनाई। इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान की पहल उन्होंने कहा- भारत सरकार ने 2019 में इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान शुरू किया था। यह दुनिया की पहली योजना है, जो शीतलन की जरूरतों को ऊर्जा दक्षता, ओजोन सुरक्षा और जलवायु नीति से जोड़ती है। इसके तहत 2037-38 तक रेफ्रिजिरेंट की मांग को 20 से 30 प्रतिशत घटाने और एक लाख से अधिक तकनीशियनों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। आनंद कुमार ने बताया- भारत ने कोप-26 में पांच बड़े संकल्प लिए, जिन्हें पंचामृत कहा गया। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और 2070 तक नेट-जीरो हासिल करना शामिल है। उन्होंने मिशन लाइफ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि यह अभियान स्थायी और पर्यावरण-संवेदनशील जीवनशैली को बढ़ावा देने वाला वैश्विक आंदोलन है। हरियाळो राजस्थान अभियान से 11 करोड़ पौधे लगाए
प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय ने कहा- ओजोन परत धरती पर जीवन की अदृश्य ढाल है। इसे बचाना सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने हरियालो राजस्थान महाभियान के तहत इस साल 11 करोड़ से अधिक पौधे लगाए हैं। ओजोन परत में हो रहा सुधार राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष रवि कुमार सुरपुर ने कहा कि 1980 में वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में बड़ा छेद पाया था। इसके बाद मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल लागू हुआ और अब 35 साल बाद परत में सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रीन जॉब्स को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ हो सके। राज्य स्तरीय समारोह में प्रदर्शनी का उद्घाटन कार्यक्रम में आनंद कुमार ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुदेश यादव और राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष रमेश अरोड़ा ने व्याख्यान दिए। इस दौरान तान्या सक्सेना और ग्रुप ने जलवायु संकट पर आधारित क्लासिकल नृत्य की परफॉर्मेंस दी।