श्री गुरु नानक देव जी के 557वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा नानकशाही में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। संप्रदाय कार सेवा सरहाली साहिब (तरनतारन) की प्रबंधकीय टीम धार्मिक समागमों और तैयारियों का जायजा लेने के लिए ढाका पहुंच चुकी है। आगामी 4 दिसंबर को गुरुद्वारा नानकशाही में प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें शामिल होने के लिए भारत से सिख श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था भी बांग्लादेश पहुंचेगा। गौरतलब है कि कार सेवा सरहाली साहिब के मुखी संत बाबा सुखा सिंह जी और संत बाबा हाकम सिंह जी के नेतृत्व में वर्ष 2004 से बांग्लादेश के ऐतिहासिक गुरुधामों की देखरेख, रखरखाव और धार्मिक सेवाओं का जिम्मा निरंतर निभाया जा रहा है। संप्रदाय हर साल भारत से संगत का जत्था बांग्लादेश भेजता है, जहां श्रद्धालु ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन कर धार्मिक कार्यक्रमों में हाजिरी भरते हैं। गुरुद्वारा नानकशाही में साप्ताहिक गुरमत समागम आयोजित प्रकाश पर्व की तैयारियों के सिलसिले में ढाका पहुंची संप्रदाय की टीम की मौजूदगी में ऐतिहासिक गुरुद्वारा नानकशाही में साप्ताहिक गुरमत समागम का आयोजन किया गया। समागम का आरंभ श्री सुखमनी साहिब के पाठ से हुआ, जिसके उपरांत डॉ. एम. के. राय, सुभाष जी और जतिन कुमार ने रसभिने गुरबाणी कीर्तन से संगतों को निहाल किया। इस धार्मिक समागम में संप्रदाय के महासचिव हरभजन सिंह संधू, बांग्लादेश गुरुद्वारा मैनेजमेंट बोर्ड (कोलकाता) के अध्यक्ष अजीब सिंह बोपाराय, बांग्लादेश गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अमर चंद, सचिव तपोस लाल चौधरी और लगभग 400 स्थानीय व विदेशी श्रद्धालु शामिल हुए। बांग्लादेश में सिख विरासत का संरक्षण समागम को संबोधित करते हुए महासचिव हरभजन सिंह संधू ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी की पावन बाणी और शिक्षाएं संपूर्ण मानवता को सांझीवालता, निस्वार्थ सेवा, नाम सिमरन और सर्वहित का संदेश देती हैं। उन्होंने स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय संगत से प्रकाश पर्व के आयोजनों को सफल बनाने के लिए सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि संप्रदाय कार सेवा सरहाली साहिब की यह पहल बांग्लादेश में सदियों पुरानी सिख विरासत के संरक्षण, ऐतिहासिक गुरुद्वारों की देखरेख, सेवा-संभाल और गुरमत प्रचार-प्रसार के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
