दौसा रेलवे जंक्शन के पास सोमवार देर रात मालगाड़ी की चपेट में आने से सब इंस्पेक्टर राजेंद्र सैनी की मौत के मामले में 20 घंटे बाद भी गतिरोध बना हुआ है। जिला अस्पताल में धरने पर बैठे परिजन मुआवजे समेत कई मांगों पर अड़े हुए हैं। परिजन मांगें पूरी होने तक शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराने पर अड़े हुए हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा समझाइश के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल गतिरोध बना हुआ है। विधायक दीनदयाल बैरवा और जिला प्रमुख हीरालाल सैनी ने मौके पर पहुंच घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार का विरोध जताया और परिजनों के साथ मॉर्च्युरी के पास धरने पर बैठ गए। इसके बाद सैनी समाज के कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भी धरनास्थल पहुंच प्रशासन के समक्ष डिमांड रखी। सूचना पर एसडीएम मूलचंद लूणिया ने मौके पर पहुंच लोगों से वार्ता की तो एक परिजन को नौकरी और राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि पर सहमति बनी। लेकिन मुआवजे की मांग पर मामला अटक गया। सांसद-विधायक अस्पताल पहुंचे
धरना दे रहे लोगों का कहना था कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, ऐसे में पांच करोड़ रुपए मुआवजा और पांच बीघा जमीन मिलनी चाहिए। प्रशासन द्वारा उक्त मांगों के सम्बन्ध में सरकार के स्तर पर ही निर्णय होने की बात कही। ऐसे में फिलहाल समझाइश का दौर जारी है। मंगलवार शाम को सांसद मुरारीलाल मीणा ने भी जिला अस्पताल पहुंचकर धरनार्थियों से पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान विधायक दीनदयाल बैरवा, जिला प्रमुख हीरालाल सैनी, पूर्व विधायक जीआर खटाणा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओढ सहित सैनी समाज के लोग बडी तादाद में मौजूद हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। धरनार्थियों ने कहा कि जब तक पांच करोड़ मुआवजे का चेक नहीं मिलेगा, तब तक धरना खत्म नहीं करेंगे। ऐसे में मामले को लेकर गहमागहमी बनी हुई है। 2021 एसआई भर्ती में चयनित हुआ था
मृतक राजेंद्र सैनी 2021 एसआई भर्ती का चयनित था, जो धौलपुर में पोस्टेड था। मृतक राजेंद्र मूलत: भरतपुर जिले के भुसावर थाना क्षेत्र के बल्लभगढ़ का निवासी है और फिलहाल परिवार के साथ अलवर के गंज खेरली में रहता था। मृतक एसआई के रिश्तेदार ने बताया कि कल देर शाम को घटना की सूचना मिली थी। जिस दिन से परीक्षा रद्द हुई थी वह उसी दिन से डिप्रेशन में आ गया था। इसके बाद यह भी कहा था कि अब तो परीक्षा रद्द हो गई, अब या तो परीक्षा रहेगी या फिर मैं। ये 8 भाई-बहन हैं और परिवार खर्च इसकी नौकरी से चलता था। नौकरी लगने पर उम्मीद जगी थी कि वह घर की स्थिति में सुधार करेगा, लेकिन अब कुछ नहीं बचा।
