राजनीति में अक्सर चुनाव हारने के बाद प्रत्याशी अकेले पड़ जाते हैं, लेकिन बीकानेर में एक हारे हुए सरपंच प्रत्याशी के परिवार की मदद के लिए पूरे गांव के लोग आगे आ गए। जिले की गुंसाईसर ग्राम पंचायत में पुरखाराम की पत्नी दाखा ने सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था। लेकिन वे 96 वोटों से चुनाव हार गईं। घर का अधिकांश पैसा चुनाव प्रचार में लगने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। जब इस बात की जानकारी ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को लगी तो उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद करने का फैसला किया। इसके बाद आपसी सहयोग से 7 लाख रुपए की सहायता राशि जुटाई गई, जिसकी माला पुरखाराम को पहनाई गई। ग्रामीणों ने कहा- पहले परिवार की आर्थिक हालत संभालें, चुनाव फिर आएंगे और तब गांव वाले उसके साथ खड़े रहेंगे। पत्नी को चुनाव लड़वाया, हारे तो पूरा गांव घर पहुंचा
जानकारी के अनुसार, एससी महिला के लिए सीट रिजर्व होने के कारण ग्रामीणों के कहने पर पुरखाराम की पत्नी दाखा को चुनावी मैदान में उतारा गया था। उनके सामने मणि नामक महिला ने चुनाव लड़ा था। नतीजों में मणि को 1403 और दाखा को 1309 वोट मिले। ऐसे में दाखा 96 वोट के अंतर से चुनाव हार गई। चुनाव में हुए खर्च के बाद परिवार की स्थिति आर्थिक रूप से बिगड़ गई। इसकी जानकारी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता रामनिवास गोदारा और ग्रामीणों को पता लगी तो उन्होंने परिवार की मदद करने का फैसला किया। गांव में मुहिम चलाई गई और बैठक हुई। इसमें ग्रामीणों ने आपसी सहमति से फैसला किया कि वे पुरखाराम और उसके परिवार की मदद करेंगे और किसी भी हालत में अकेला नहीं छोडेंगे। आपसी सहयोग से जुटाकर दिए 7 लाख रुपए
ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से 7 लाख रुपए एकत्र किए। इसके बाद बुधवार को पुरखाराम नायक का सम्मान करते हुए ग्रामीण उसके घर पहुंचे और 500-500 नोटों की गड्डियों से बनी माला पहनाकर उन्हें हौंसला दिया। ग्रामीणों ने कहा कि यह मदद किसी एहसान के तौर पर नहीं, बल्कि गांव के बेटे के साथ खड़े होने का प्रयास है। ग्रामीणों ने पुरखाराम से कहा कि वे पहले अपनी आर्थिक स्थिति संभालें, चुनाव फिर आएंगे और उस समय गांव उनके साथ खड़ा रहेगा। सामाजिक कार्यकर्ता रामनिवास गोदारा ने कहा- पुरखाराम मामूली अंतर से चुनाव हारे थे। लेकिन परिवार की हालत को सुधारने के लिए सभी ने एकजुटता दिखाते हुए मदद करने की पहल की थी। पुरखाराम बोले- मैं गांव का था और हमेशा रहूंगा
पुरखाराम नायक ने ग्रामीणों का आभार जताते हुए कहा- मैं गांव का हूं और रहूंगा। गांव वालों ने जिस तरह मेरा साथ दिया है, मैं उसे कभी नहीं भूलूंगा। गांव वाले सदैव मेरे साथ हैं और मैं भी हमेशा गांव के लोगों के बीच रहूंगा। हालांकि इस मौके पर उनकी पत्नी दाखा भी भावुक हो गई और उन्होंने कहा कि उनका परिवार हमेशा गांव वालों के साथ रहेगा। ये खबर भी पढ़िए… सरपंच चुनाव हारी प्रत्याशी को ग्रामीणों ने दिए 25 लाख:आपसी सहमति से इलेक्शन लड़वाया था, बोले-भाईचारा और एकता हार-जीत से बड़ी है गले में माला, सिर पर साफा और हाथों में रुपयों से भरा थाल। तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारे। ये नजारा नागौर की मूंडवा पंचायत समिति की भदौरा ग्राम पंचायत के सरपंच चुनाव में हारीं चिड़ी देवी के घर का है। पूरी खबर पढ़िए
