नागौर जिले का एक गांव ‘सारंगावास’ सरकारी कागजों में तो दर्ज है, लेकिन धरातल पर इसकी पहचान सिर्फ एक गली तक सीमित रह गई है। गांव में 2 परिवारों के कुल 12 वोटर्स रहते हैं। बुधवार को होने वाले जिला परिषद सदस्य के मतदान के लिए गांव में अलग से पोलिंग बूथ बनाया गया है। गांव में सुविधाएं न के बराबर हैं और गांव में बनी एकमात्र पानी की टंकी भी साल 1980 में बनी थी। पंचायत चुनाव को लेकर गांव चर्चा में हैं। दरअसल, गांव की ग्राम पंचायत सैसड़ा में पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव बुधवार(28 अक्टूबर)को होने हैं। जबकि सरंपच के चुनाव 30 अक्टूबर को होंगे। लेकिन सीमाओं के कन्फ्यूजन को लेकर प्रत्याशी भी यहां वोट मांगने नहीं आते हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट एक गली में सिमटा गांव, सिर्फ 12 वोटर्स
सारंगावास राजस्व ग्राम, सथाना कलां गांव के बीच एक गली में बसा हुआ है। बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के अभाव के कारण यहां लगातार वोटर्स की संख्या घट रही है। पहले गांव में 60 मतदाता थे, उनमें अब अधिकांश ने दूसरी पंचायत में नाम जुड़वा लिए हैं। इसके कारण अब यहां 12 वोटर ही बचे हैं। पंचायती राज चुनाव के दौरान सारंगावास के 12 मतदाताओं के लिए ग्राम पंचायत सैसड़ा मुख्यालय पर अलग से पोलिंग बूथ बनाया गया है, जहां निर्वाचन विभाग की पूरी टीम तैनात रहेगी। गांव में फिलहाल सिर्फ 2 परिवार रहते हैं। दोनों परिवार में कुल 12 वोटर्स है। इनमें बीदामी देवी(86), नाथूलाल(71), सत्यनारायण(59), दिनेश चंद्र व्यास(35), भंवराराम(42), राधेश्याम(43), अशोक(28), टोडरमल(57), मैनादेवी(69), पपू देवी(57), निर्मला पारीक(34) और दामोदर पारीक(30) शामिल है। न पहचान बोर्ड, न गूगल मैप पर मौजूदगी
गांव में कोई पहचान या साइन बोर्ड नहीं लगा है और गूगल मैप्स पर भी इसकी लोकेशन नहीं है। बाहरी व्यक्ति के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि वह सारंगावास गांव में खड़ा है। ग्रामीण घनश्याम व्यास ने बताया- राजस्व ग्राम सारंगावास, सथाना कलां ग्राम पंचायत के बीच एक गली में बसा है। इसकी पंचायत समिति भेरूंदा और ग्राम पंचायत सैसड़ा है। जबकि सारंगावास गांव सेंसडा ग्राम पंचायत की रियाबड़ी पंचायत समिति में है। इसके कारण सथाना कलां गांव के बीच में बसकर भी यहां के वोटर्स को दूसरी पंचायत समिति में काम के लिए दूर जाना पड़ता है। हमनें भी इसलिए हमारा नाम यहां से कटवा कर दूसरी ग्राम पंचायत में जुड़वा लिया है। वही राजस्व ग्राम सारंगावास मेड़ता विधानसभा क्षेत्र में आता है, जबकि सारगांवास की आबादी सथाना कलां गांव के बीच स्थित है, जो डेगाना विधानसभा क्षेत्र में आता है। ग्रामीण बोले- कन्फ्यूजन के कारण वोट मांगने भी नहीं आते प्रत्याशी
ग्रामीण यशपाल पारीक ने बताया- पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव के दौरान प्रत्याशियों में भी गांव के वोटर्स को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। यहीं वजह है कि आजादी के बाद भी आज तक सारंगावास गांव में विधानसभा प्रत्याशी वोट मांगने ही नहीं पहुंचे, जिसके कारण गांव का विकास अभी तक अटका हुआ है। पूर्व सरपंच बोले- मनरेगा के लिए रजिस्टर भी करवाया था
सैसड़ा के पूर्व सरपंच नेमाराम ने बताया- सैसड़ा ग्राम पंचायत में सारंगावास राजस्व गांव है, जो पूरा सथाना कलां ग्राम पंचायत के बीच में है। हमने सुधार करवाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई प्रयास किए, लेकिन सुधार नहीं हो पाया। हालांकि हमने सारंगावास के ग्रामीणों को नरेगा स्कीम के तहत रजिस्ट्रर भी करवाया और ग्राम जेजासनी में एक तालाब में काम भी शुरू करवाया था। लेकिन सारंगावास से करीब 3 किलोमीटर दूरी होने की वजह से वहां कोई नहीं आया। हम अब भी सुविधाओं के लिए प्रयास कर रहे हैं। नागौर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… सरपंच चुनाव हारी प्रत्याशी को ग्रामीणों ने दिए 25 लाख:आपसी सहमति से इलेक्शन लड़वाया था, बोले-भाईचारा और एकता हार-जीत से बड़ी है गले में माला, सिर पर साफा और हाथों में रुपयों से भरा थाल। तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारे। ये नजारा नागौर की मूंडवा पंचायत समिति की भदौरा ग्राम पंचायत के सरपंच चुनाव में हारीं चिड़ी देवी के घर का है। पूरी खबर पढ़िए