उदयपुर में नगर निगम का नया भाजपा बोर्ड बनने के करीब एक महीने बाद ही पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी सबके सामने आ गई है। यह विवाद शोभागपुरा और यूनिवर्सिटी रोड के बीच बने एक चौराहे पर नए टावर के नामकरण और उसके लोकार्पण को लेकर है। इस मामले में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन और महापौर पारस सिंघवी आमने-सामने हो गए हैं। दो दिन तक चली बयानबाजी के बाद अब नाराज शहर विधायक जैन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर पूरे मामले की शिकायत की है। बिना अनुमति के किया गया चौराहे का उद्घाटन विधायक ताराचंद जैन का कहना है कि यह चौराहा उनके शहरी क्षेत्र में आता है और विकास कार्य उनके प्रयासों से हुए। फिर भी उन्हें बुलाए बिना और बिना अनुमति के उद्घाटन कर दिया गया। वहीं मेयर पारस सिंघवी का कहना है कि उन्हें खुद आखिरी समय पर कार्यक्रम की जानकारी मिली थी और वे सहज भाव से वहां चले गए, उनके मन में किसी को दरकिनार करने की मंशा नहीं थी। उधर, इस पूरे विवाद के पीछे ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा की भी भूमिका भी अहम मानी जा रही है, लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने इस बार भी मामले पर चुप्पी साध रखी है। दरअसल, बीते रविवार (18 अक्टूबर) की शाम को महापौर पारस सिंघवी और उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने इस चौराहे पर बने टावर का उद्घाटन कर दिया। इस कार्यक्रम की शहर विधायक ताराचंद जैन को कोई सूचना नहीं दी गई। विवाद की सबसे बड़ी वजह टावर का नाम है। जिस चौराहे और टावर का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के नाम पर तय होने का दावा किया जा रहा था, उसका लोकार्पण आर्किटेक्ट्स टावर के नाम से कर दिया गया। अपने ही क्षेत्र में खुद को दरकिनार किए जाने से विधायक जैन नाराज हैं। शहर विधायक ताराचंद जैन ने 21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि शोभागपुरा चौराहा शहर का सबसे व्यस्त चौराहा है। उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) के जरिए उनके क्षेत्र में 50 से 60 काम पूरे किए गए हैं और 31 मार्च तक इन चौराहों का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विधायक ने पत्र में 5 प्रमुख बिंदु उठाए हैं। इस पूरे विवाद के पीछे ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा का नाम भी सामने आ रहा है। मीणा खुद खुलकर सामने आने या जवाब देने के बजाय सिंघवी को आगे कर अपनी राजनीति करते रहे हैं। वे पार्टी के बड़े नेताओं या शहर विधायक को जवाब देने के बजाय हर मामले से अनभिज्ञता जताते हैं। दैनिक भास्कर ने इस मामले में उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, लेकिन हर बार की तरह उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। क्या है पूरा विवाद ताराचंद जैन और पारस सिंघवी के बीच यह सियासी टकराव नया नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनाव में जब पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के करीबी ताराचंद जैन को उदयपुर शहर से टिकट मिला, तब टिकट के प्रबल दावेदार रहे पारस सिंघवी ने उनका खुलकर विरोध किया था। इसके बाद करीब डेढ़ साल पहले जब गजपाल सिंह राठौड़ को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया, तब सिंघवी को शहर महामंत्री का पद मिला। राठौड़ की कार्यकारिणी में कटारिया और विधायक जैन के समर्थकों को जगह नहीं दी गई, जिससे दोनों गुटों की खींचतान और बढ़ गई। हाल ही में सिंघवी को मेयर बनाने में भी जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह की अहम भूमिका रही है। लंबे समय से कटारिया खेमे के नेताओं को हाशिए पर धकेलने की जो सियासत अंदरखाने चल रही थी, वह अब इस चौराहे के उद्घाटन के बहाने खुलकर सड़क पर आ गई है।