राजस्थान दिव्यांग कर्मचारी संघ ने बुधवार को शहीद स्मारक पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना दिया। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार से अपनी जायज मांगों पर जल्द विचार करने का आग्रह किया। इस आक्रोश सभा को अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के महासंघ प्रमुख महेंद्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र राना और कोषाध्यक्ष कैलाश शर्मा ने संबोधित किया। इनके अलावा, राजस्थान दिव्यांग कर्मचारी/अधिकारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह और महासचिव दिनेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य भी मौजूद रहे। दिव्यांग कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष दयानंद स्वर्णकार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो राजस्थान के सभी दिव्यांग कर्मचारी और अधिकारी सड़कों पर उतरकर अपनी मांगें मनवाएंगे। कर्मचारियों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को सराहनीय बताया। हालांकि, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नए, पुराने और सेवानिवृत्ति के करीब के सभी कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों की दोबारा मेडिकल बोर्ड से जांच करने पर कई कर्मचारियों की दिव्यांगता का प्रतिशत कम हो सकता है। इससे उन कर्मचारियों पर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है, जिन्होंने कई वर्षों की सेवा पूरी कर ली है और जिनका प्रमाण पत्र 40 प्रतिशत से कम हो सकता है। इस आदेश के कारण सभी दिव्यांग कर्मचारियों और अधिकारियों में अपनी दिव्यांगता प्रतिशतता 40 प्रतिशत से कम होने का भय व्याप्त है। कर्मचारियों की एक प्रमुख मांग पदोन्नति में नोशनल फायदा से संबंधित है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में 28 दिसंबर 2023 को एक परिपत्र जारी कर जून 2016 से पदोन्नति में नेशनल लाभ के आदेश दिए थे। राजस्थान दिव्यांग कर्मचारी महासंघ उसी दिन से राज्य सरकार से केंद्र के अनुरूप आदेश जारी करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन 22 महीने बाद भी ये आदेश जारी नहीं हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 19 मार्च 2025 को समान अवसर नीति 2025 का गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे कानून बना दिया गया था, लेकिन अभी तक किसी भी विभाग ने इस कानून का पालन नहीं किया है। 01 दिसंबर 2021 को राज्य सरकार ने पदोन्नति में 4% होरिजेंटल आरक्षण दिया था पर कुछ विभाग को छोड़कर अधिकतर विभागों ने पालना नहीं की। महासंघ के प्रदेश महामंत्री विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि धरने के बाद इन मांगों को लेकर महासंघ प्रतिनिधि मंडल ने प्रमुख शासन सचिव कार्मिक विभाग सुरुचि त्यागी को ज्ञापन दिया। त्यागी ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। नीतिगत प्रकरण होने से सकारात्मक टिप्पणी के साथ प्रकरण को राज्य सरकार को भेजने का आश्वासन दिया।