हाईकोर्ट ने न्यायालय ने जोधपुर ग्रामीण पुलिस के भोपालगढ़ उप अधीक्षक भूराराम खिलेरी को बिना वैध आधार बताए एपीओ (APO) करने के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने सुनवाई करते हुए कहा- 21 अक्टूबर का एपीओ आदेश राजस्थान सिविल सर्विसेज रूल्स 1951 के नियम 25-A का उल्लंघन करता है। न्यायालय ने सरकार को नई पोस्टिंग देने की छूट देते हुए मामले में अगली सुनवाई 5 दिसंबर के लिए तय की है। भोपालगढ़ में एक स्थानीय भाजपा नेता से मारपीट के मामले में विवादों में घिरे भोपालगढ़ सीओ भूराराम खिलेरी को पुलिस मुख्यालय ने 21 अक्टूबर को एपीओ कर दिया था। इसके तीन दिन बाद 24 अक्टूबर को रिलीविंग ऑर्डर जारी किया गया था। खिलेरी ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए राज्य सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (गृह विभाग), डीजीपी, आईजी जोधपुर रेंज और एसपी जोधपुर ग्रामीण को प्रतिवादी बनाया है। याचिकाकर्ता के वकील का तर्क
खिलेरी की ओर से वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को राजस्थान सिविल सर्विसेज रूल्स 1951 के नियम 25-A के विपरीत अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर में रखा गया था। वकील ने कहा कि नियम में ऐसी स्थितियां स्पष्ट रूप से गिनाई गई हैं, इनमें APO आदेश जारी किए जा सकते हैं, लेकिन 21 अक्टूबर के विवादित आदेश में उन वैध आधारों में से किसी का भी उल्लेख नहीं है, जो अधिकारियों को नियम 25-A के तहत APO आदेश जारी करने का अधिकार देता।​ आदेश में विशिष्ट आधार नहीं
हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर के विवादित आदेश की जांच की और पाया कि यह आदेश राजस्थान सिविल सर्विसेज रूल्स 1951 के नियम 25-A के तहत गिनाए गए किसी विशिष्ट आधार को प्रतिबिंबित नहीं करता है। कोर्ट ने कहा कि आदेश में केवल प्रशासनिक आधारों का संदर्भ दिया गया है, जो नियम 25-A की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता।​ नियम 25-A के अनुसार, किसी सरकारी कर्मचारी को APO में केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही रखा जा सकता है, जैसे कि अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होना, जांच चल रही हो, या अन्य वैध प्रशासनिक कारण। हालांकि, केवल “प्रशासनिक आधार” का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है – विशिष्ट और वैध कारण बताना आवश्यक है।​ एपीओ और रिलीविंग ऑर्डर पर रोक, नए आदेश पर रोक नहीं
मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर के विवादित APO आदेश और 24 अक्टूबर के रिलीविंग आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ता को नई पोस्टिंग देने के लिए नया आदेश जारी करने के रास्ते में नहीं आएगा। यानी, यदि अधिकारी नियम 25-A के अनुरूप वैध आधारों के साथ नया आदेश जारी करना चाहें, तो वे ऐसा कर सकते हैं।​ कोर्ट ने इस संबंध में प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। प्रतिवादियों को चार सप्ताह की अवधि के भीतर जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को तय की गई है, जब कोर्ट दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अंतिम निर्णय देगा।​
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