लुधियाना के समराला में पुलिस ने एक ढाबे में चल रहे नशा मुक्ति केंद्र का पर्दाफाश किया है। चंडीगढ़-लुधियाना नेशनल हाईवे पर घुलाल टोल प्लाजा के पास चल रहे केंद्र में से 133 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। यहां भगोड़ा घोषित और बेल जंपर आरोपी मिले हैं। इसके साथ यहां से एक चोरी की बाइक भी बरामद की गई है। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले संचालक फरार हो चुके थे बताया गया कि यह केंद्र अवैध रूप से डेढ़ साल से चलाया जा रहा था। संचालकों के पास न तो कई लाइसेंस था न अनुमति पत्र। न ही यहां किसी प्रकार के मानका पालन हो रहा था। मरीजों से मोटी फीस वसूली जा रही थी। ताया जा रहा है कि यहां से संचालक हरमाह इलाज के नाम पर 30 लाख रुपए तक कमाई कर रहे थे जानकारी के अनुसार समराला पुलिस बंद ढाबे में अवैध रूप से नशा मुक्ति केंद्र सूचना मिली थी। जिसके अधार पर पुलिस ने सिविल अस्पताल की टीम के साथ छापेमारी की थी। मौके पर पहुंची तो बड़ी संख्या में मरीज मिले। जिन्हें वहां से हटाकर अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। न डॉक्टर न कर्मचारी, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं इस केंद्र को चार पार्टनर जगमनदीप सिंह निवासी तरनतारन, नवदीप सिंह निवासी घुड़ानी कलां (पायल), सुखविंदर सिंह निवासी सहारनमाजरा (पायल) और चरणप्रीत सिंह निवासी रोपड़ चला रहे थे। इनके पास इसे चलाने की न तो योग्यता है न उन्होंने इसका कोई लाइसेंस लिया था। यहां पर न तो कोई डॉक्टर जुड़ा था न ही किसी कर्मचारी को रखा जा रहा था। इलाज के नाम पर मरीजों को मात्र कमरों में बंद रखा जा रहा था। मरीजों को कौन सी दवा किसके प्रिक्रिप्सन से दी जा रही थी और अगर दी जा रही थी तो प्रतिबंधित दवाएं कैसे मिल रही थी। या जांच का विषये हैं। तीन कमरों में रखे जा रहे थे 133 मरीज, मात्र एक बाथरूम यहां रखे मरीजों के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं थी। यहां मात्र तीन कमरे औऱ एक हाल था। यहां कुल 133 मरीज भर्ती थे। उनके लिए एक ही बाथ रूम था। मरीजों को सोने के लिए जमीन पर सोने के लिए बिस्तर लगाए गए थे। मरीजों को कहना है कि यहा इलाज की कोई व्यवस्था नही हैं। प्रति मरीज मोटी कमाई, 25 से 30 लाख रुपये की मासिक वसूली मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी प्रितपाल सिंह संधू ने बताया कि नशा छुड़ाने के नाम पर यह केंद्र पूरी तरह गैर-कानूनी ढंग से चल रहा था। मरीजों के परिजनों से इलाज के नाम पर हर महीने 25 से 30 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली जाती थी। हर मरीज से 15 से 20 हजार रुपए महीन लिया जाता था। मरीजों का कहना है कि खाना भी यहां ठीक से नहीं मिलता और अछा भी नहीं मिलता था
जानिए क्या मिला वहां से 40 पर आपराधिक मामले दर्ज, 7 भगोड़े और 7 बेल जंपर बरामद जांच के दौरान केंद्र से रेस्क्यू किए गए लोगों में से 40 लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। इन पर पंजाब के विभिन्न थानों में नशा तस्करी, चोरी और लूटपाट जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस को यहां से 7 घोषित भगोड़े (Proclaimed Offenders) और 7 बेल जंपर (ज़मानत से भागे आरोपी) भी मिले हैं, जो पुलिस से बचने के लिए यहां छिपे हुए थे। नाबालिग भी किए गए रेस्क्यू, चोरी की बाइक बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस को केंद्र में कुछ नाबालिग लड़के भी मिले, जिन्हें तुरंत रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। इसके अलावा पुलिस ने मौके से एक चोरी की मोटरसाइकिल भी बरामद की है। इसकी जांच की जानी है कि यह बाइक कहां से आई थी
चार संचालकों की भूमिका की जांच, तलाश जारी पुलिस जांच में केंद्र का संचालन करने वाले चार मुख्य आरोपियों के नाम सामने आए हैं। इनमें से एक आरोपी तरनतारन का और एक घुडाणी कलां का रहने वाला बताया जा रहा है, जबकि बाकी अन्य आरोपियों की पहचान और जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने सभी संचालकों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। संचालकों के खिलाफ अवैध नशा छुड़ाओ केंद्र चलाने, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों व भगोड़ों को शरण देने समेत कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसमें और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। कि यह केंद्र कब से चल रहा था, यहां अब तक कितने लोगों को रखा गया और इसके पूरे नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।