डूंगरपुर जिले में आदिवासी किसानों की जमीनों पर नाम बदलने के मौखिक दबाव और वन भूमि के पट्टों के नाम पर अवैध वसूली के विरोध में प्रदर्शन हुआ। ‘राजस्थान शेड्यूल एरिया संघर्ष समिति’, ‘शेड्यूल एरिया ग्रामसभा’ और ‘राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद’ ने मिलकर कलेक्ट्रेट पर यह प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। राजस्थान शेड्यूल एरिया संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शंकरलाल कटारा ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी किसानों की जमीनों पर कई सालों से जुर्माना लग रहा है। प्रशासन मौखिक दबाव बनाकर परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर नए जुर्माने के नोटिस जारी कर रहा है।
पहले से चल रहे नामों को बदलकर नए नाम से नोटिस जारी करने की वजह से वरीयता अवधि पर असर पड़ रहा है। इससे किसानों को कानूनी और आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि यह असंवैधानिक दबाव और नाम बदलने की कार्रवाई तुरंत बंद की जाए। वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
कटारा ने वन विभाग दोवड़ा के कामकाज पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि वन भूमि पर जिन आदिवासियों का कब्जा है और जिन्हें वन अधिकार कानून तथा पैसा एक्ट के तहत पहले पट्टे दिए गए थे, उन्हें अब विभाग यह कहकर गुमराह कर रहा है कि उनके पट्टे रद्द कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए पट्टे जारी करने के बदले में किसानों से 5-5 हजार रुपये जमा करने की मांग की जा रही है, लेकिन इसके लिए कोई पक्की रसीद नहीं दी जा रही है। समिति ने जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर इस मामले में कार्रवाई करने और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन रोकने की मांग की है।
