झालावाड़ के पीएम श्री उच्च माध्यमिक स्कूल दुर्गपुरा में मंगलवार, 16 सितंबर को तनाव प्रबंधन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से निपटने और शिक्षकों को कार्यस्थल के तनाव को नियंत्रित करने की जानकारी दी गई। राजस्थान सरकार के मानक प्रारूप के तहत आयोजित प्रशिक्षण में जिला नोडल अधिकारी डॉ. रश्मि ने तनाव के कारण, लक्षण और उससे निपटने के प्रभावी तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। प्रशिक्षण से पहले और बाद में हुआ मूल्यांकन कार्यशाला में प्रशिक्षण शुरू होने से पहले और प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का मूल्यांकन किया गया। इसका उद्देश्य दी गई जानकारी और प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करना था। डॉ. रश्मि ने तनाव को समय रहते पहचानने और उसका सही तरीके से प्रबंधन करने की जरूरत पर जोर दिया। परीक्षा तनाव कम करने की बताई तकनीकें डॉ. रश्मि ने विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान तनाव कम करने के लिए एसक्यू3आर अध्ययन पद्धति, सजगता अभ्यास और तनाव प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया। उन्होंने तनाव से निपटने के प्रभावी और अप्रभावी तरीकों तथा उनके दूरगामी प्रभावों पर भी चर्चा की। विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई, पर्याप्त आराम, सकारात्मक सोच और समय प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, तनाव अधिक बढ़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने और 14416 सहायता सेवा के बारे में भी जानकारी दी गई। समय पर पहचान और मदद जरूरी प्रधानाध्यापक हेमंत शर्मा ने कहा कि मौजूदा समय में इस तरह के प्रशिक्षण की बहुत जरूरत है। हर व्यक्ति कभी न कभी तनाव महसूस करता है, लेकिन कई बार उसे यह जानकारी नहीं होती कि मदद कहां और कैसे मिलेगी। समय पर सही सहायता नहीं मिलने पर तनाव मानसिक समस्याओं और नशे की लत का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि तनाव को गंभीर स्थिति बनने से पहले पहचानना और उसका उचित प्रबंधन करना जरूरी है। बीमारी के इलाज से बेहतर है कि बीमारी की स्थिति ही पैदा न होने दी जाए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को तनाव के प्रति जागरूक करना और उन्हें तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने के तरीके बताना रहा।