राजस्थान हाईकोर्ट के झालामंड स्थित भवन की खराब हालत और निर्माण में तकनीकी कमियों को लेकर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट को बताया गया कि भवन की मरम्मत और सुधार पर अनुमानित 117.65 करोड़ रुपए खर्च होंगे। सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा समेत संबंधित अधिकारी अदालत में मौजूद थे। उन्होंने अब तक गिरफ्तार किए गए अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में अपनी बात रखी। अधिकारियों ने बताया कि एडीजी वीके सिंह की निगरानी में मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी। तीन चरणों में मरम्मत का काम करने का प्रस्ताव मौजूद अधिकारियों ने भवन की मौजूदा स्थिति, स्ट्रक्चरल ऑडिट और मरम्मत कार्यों पर एक रिपोर्ट पेश की। आईआईटी बॉम्बे की अंतिम स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट मिल चुकी है। इसमें भवन में जंग लगने, कंक्रीट की गुणवत्ता में कमी, कार्बोनेशन, क्लोराइड के असर और नमी से हुए नुकसान की बात सामने आई है। रिपोर्ट में केंद्रीय डोम को गिराने की सिफारिश नहीं की गई है, बल्कि इसे सुरक्षित तरीके से मरम्मत करने को कहा गया है। मरम्मत का काम तीन चरणों में करने का प्रस्ताव है। आरएसआरडीसी ने भवन की निगरानी के लिए नियमित, साप्ताहिक और हर पंद्रह दिन में निरीक्षण की व्यवस्था की है। पहले चरण के लिए 27.50 करोड़ और दूसरे चरण के लिए करीब 30 करोड़ रुपए मंजूर हो चुके हैं। तीसरे चरण के लिए करीब 60 करोड़ रुपए का अनुमान है और इसकी मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। अधिवक्ता चैंबर्स और एजी-एएजी भवनों का भी आईआईटी बॉम्बे से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जा रहा है। खराब निर्माण के मामले में एफआईआर दर्ज है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई 30 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। नए भवन में 50 कोर्ट रूम और भविष्य में 10 अतिरिक्त कोर्ट रूम बढ़ाने के लिए डीपीआर बनाने हेतु 1.50 करोड़ रुपए की वित्तीय मंजूरी दी गई है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 05 अक्टूबर को तय की गई है।
