उदयपुर में बीजेपी की महिला नेता के कथित वीडियो कांड ‘उदयपुर फाइल्स’ में आरोपी को जोधपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने आरोपी को जेल से रिहा करने के आदेश जारी कर दिए हैं। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत को बताया- कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए माना कि शुरुआती शिकायत के बाद पुलिस में दिए गए बयानों और आरोपों में बदलाव किया गया है, जिसमें बाद में जबरन वसूली जैसे आरोप जोड़े गए। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल और स्पाई कैमरे के मेमोरी कार्ड से शिकायतकर्ता के बताए गए आरोप साबित नहीं होते, बल्कि रिकवरी में वीडियो कुछ और ही स्थिति बयां करते हैं। शुरुआत में दर्ज बयानों में जबरन वसूली या गंभीर धाराओं के कोई आरोप नहीं लगाए गए थे। बाद में पुलिस में दिए गए सप्लीमेंट्री बयान में ये सारी बातें जोड़ी गईं। वकील ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने जब मोबाइल और मेमोरी कार्ड की जांच की तो उसमें कोई भी आपत्तिजनक वीडियो नहीं मिला। रिकवरी में कुछ अन्य वीडियो सामने आए हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कई अहम बिंदुओं पर विचार किया। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि इस मामले में चार्जशीट पहले ही पेश की जा चुकी है, आरोपी पिछले सात महीने से जेल में है और ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लगेगा। इसी साल केस दर्ज हुआ था दरअसल, इसी साल 11 फरवरी को भूपालपुरा थाने में महिला नेता की रिपोर्ट पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से आरोपी जेल में बंद हैं। पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने उसे अपने ऑफिस बुलाकर कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिला दिया था। जब वह बेहोश हो गई, तो आरोपी ने उसका अश्लील वीडियो बना लिया और बाद में उसे वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगा था। करीब 25 दिन पहले ही आरोपी की दूसरे केस (धोखाधड़ी) में भी हाईकोर्ट से जमानत हुई थी। आरोपी बुधवार को जेल से बाहर आ सकेगा। मुख्य ट्रायल पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा जस्टिस संदीप शाह की बेंच ने आरोपी को पचास हजार रुपये के निजी मुचलके और पच्चीस-पच्चीस हजार की दो जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि जमानत आदेश की ये बातें सिर्फ इसी याचिका के लिए हैं और मुख्य ट्रायल पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और तर्क कोर्ट ने माना कि शुरुआती शिकायत के बाद पुलिस में दिए गए बयानों और आरोपों में बदलाव किया गया है, जिसमें बाद में जबरन वसूली जैसे आरोप जोड़े गए। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए मोबाइल और स्पाई कैमरे के मेमोरी कार्ड से शिकायतकर्ता के बताए गए आरोप साबित नहीं होते, बल्कि रिकवरी में वीडियो कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इस मामले में चार्जशीट पहले ही पेश की जा चुकी है, आरोपी पिछले सात महीने से जेल में है और ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लगेगा। दरसअल, पीड़िता ने इसी साल 11 फरवरी को भूपालपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ये भी पढ़ें.. बीजेपी की महिला नेता के कथित वीडियो-कांड में चार्जशीट पेश:मेमोरी कार्ड में मिली 20 से ज्यादा क्लिप; जासूसी कैमरा बेचने वाले को बनाया गवाह बीजेपी की महिला-नेता के साथ वीडियो में दिखा व्यक्ति कौन?:डीएसपी ने फाइल ASP को नहीं दी, चार्जशीट तक पूरी जांच खुद ने की