मतदान से ठीक एक दिन पहले मंगलवार रात को कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया अपने समर्थकों के साथ कोतवाली थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस ने पुलिस पर भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि चुनाव से पहले उनके समर्थकों को बिना किसी ठोस वजह के थाने में बैठाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई कानून के तहत एहतियात के तौर पर की गई है। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति को पाबंद किया गया, उसके खिलाफ पहले से हिस्ट्रीशीटर (एचएस) होने का रिकॉर्ड है और उसके चुनावी माहौल बिगाड़ने की सूचना मिलने पर कार्रवाई की गई। कोतवाली के बाहर कांग्रेस का विरोध, पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप धरने के दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने कहा कि नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस का बोर्ड बनने की संभावना से भाजपा घबराई हुई है और उसी के दबाव में पुलिस प्रशासन काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड 50 से जुड़े अजय लोट को सुबह से थाने में बैठाकर रखा गया, जबकि इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उनका कहना था कि अगर किसी हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ कार्रवाई करनी है तो जिले के सभी ऐसे लोगों के खिलाफ एक जैसी कार्रवाई होनी चाहिए। किसी एक व्यक्ति को चुनाव से पहले थाने में बैठाकर रखना निष्पक्ष कार्रवाई नहीं माना जा सकता। मतदान के अधिकार का भी उठाया मुद्दा प्रमोद सिसोदिया ने कहा कि किसी व्यक्ति को बिना उचित कारण थाने में बैठाकर रखने से उसके मतदान के अधिकार पर भी असर पड़ता है। उनका कहना था कि कानून में किसी को पाबंद करने की प्रक्रिया तय है और उसी के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने की गारंटी ली जाती है तो उसे छोड़ देना चाहिए, ताकि वह अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई से चुनाव का माहौल प्रभावित हो सकता है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि पुलिस को किसी भी राजनीतिक दबाव से दूर रहकर निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। पुलिस ने कहा- कानून के तहत की गई एहतियातन कार्रवाई कोतवाली थानाधिकारी रजनीश कुमार ने पूरे मामले में कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले पुलिस ऐसे लोगों पर विशेष नजर रखती है, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनसे शांति भंग होने की आशंका रहती है। इसी प्रक्रिया के तहत अजय लोट के बारे में सूचना मिली थी कि वह चुनावी माहौल को प्रभावित कर रहा है और लोगों को अनुचित तरीके से धमका रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने एहतियात के तौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा 170 के तहत उसे पाबंद किया। उनका कहना था कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुसार की गई और इसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। पुलिस बोली- कार्रवाई के समय राजनीतिक पहचान की जानकारी नहीं थी थानाधिकारी ने कहा कि कार्रवाई करते समय पुलिस को यह जानकारी नहीं थी कि संबंधित व्यक्ति किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने उसे केवल उसके आपराधिक रिकॉर्ड और शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए पाबंद किया था। बाद में जब कांग्रेस नेताओं ने बताया कि वह उनके दल से जुड़ा है, तब उन्हें पूरी कानूनी प्रक्रिया समझाई गई। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि आगे भी कानून के अनुसार ही कार्रवाई होगी। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता नहीं माने और कोतवाली के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और समझाइश से माहौल शांत करवाने का प्रयास किया।