जयपुर नगर निगम चुनाव में आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 121 और 122 का मुकाबला अब सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई नहीं रह गया है। वार्ड-121 में टिकट के बाद बीजेपी के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस से बीजेपी में आए 35 साल नीरज अग्रवाल को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया तो बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता महेश ठाकुरिया निर्दलीय मैदान में उतर गए। दूसरी तरफ कांग्रेस ने स्थानीय चेहरे मुकेश विजय को प्रत्याशी बनाया है। खास बात यह है कि तीनों प्रमुख उम्मीदवार वैश्य समुदाय से हैं। ऐसे में करीब 3500 वैश्य वोटों को लेकर तीनों के बीच सीधी खींचतान है। करीब 9200 मतदाताओं वाले इस वार्ड में एक ही समाज के वोटों का बंटवारा किसके पक्ष में जाएगा, यही चुनाव का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। उधर वार्ड नंबर 122 में मुकाबला और भी दिलचस्प है। यहां बीजेपी ने अपने निवर्तमान पार्षद घनश्याम चंदलानी को एक बार फिर टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने उनके मौसेरे भाई राजकुमार संगतानी को मैदान में उतार दिया है। यानी एक तरफ रिश्तेदारी है तो दूसरी तरफ चुनावी जंग। दोनों अब जनता के बीच एक-दूसरे के पांच साल के काम और राजनीतिक दावों का हिसाब मांग रहे हैं। वार्ड-121 में टिकट के साथ शुरू हुआ बवाल वार्ड नंबर 121 में बीजेपी का टिकट नीरज अग्रवाल को मिला है। नीरज पहले कांग्रेस से जुड़े रहे और बाद में बीजेपी में आए। अब पार्टी ने उन पर भरोसा जताकर उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। लेकिन टिकट के साथ ही विरोध भी सामने आ गया। लंबे समय से बीजेपी से जुड़े महेश ठाकुरिया ने पार्टी के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए। महेश ठाकुरिया का आरोप है कि पार्टी ने उनकी जगह ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया, जो पहले दूसरी पार्टी का कार्यकर्ता रहा है। उनका कहना है कि वह लंबे समय से बीजेपी की सेवा कर रहे हैं और पार्टी के मूल संगठन से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। महेश ने खुद को स्थानीय निवासी बताते हुए कहा कि वह क्षेत्र की जनता की मांग पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 14 सितंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद सबको पता चल जाएगा कि जनता किसके साथ खड़ी है। यानी वार्ड-121 में बीजेपी के सामने चुनौती सिर्फ कांग्रेस नहीं है। पार्टी के अंदर से निकला बागी उम्मीदवार भी उसी वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है, जिस पर बीजेपी प्रत्याशी की सबसे ज्यादा नजर है। नीरज बोले- जनता मेरे साथ बीजेपी प्रत्याशी नीरज अग्रवाल ने भी माना कि पार्टी के कुछ लोग टिकट मिलने से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भीतरघात कर रहे हैं, लेकिन जनता का उन्हें पूरा समर्थन मिल रहा है। नीरज का कहना है कि वह कांग्रेस से बीजेपी में जरूर आए हैं, लेकिन बीजेपी ने उन पर विश्वास जताया है और उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। अब वह इसी विश्वास के साथ वार्ड की जनता के बीच जा रहे हैं। बाहरी प्रत्याशी बताए जाने के सवाल पर नीरज ने पलटवार करते हुए कहा कि वह पहले भी इस क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। पार्षद रहते हुए उन्होंने सिर्फ किसी एक इलाके तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जनता की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भी वह क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए काम करते रहे हैं और इसी आधार पर पार्टी ने उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने का मौका दिया है। नीरज ने दावा किया कि वह वार्ड नंबर 121 को जयपुर का नंबर वन वार्ड बनाने के लक्ष्य के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। मेयर पद की दावेदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि वह इस दौड़ में नहीं हैं। पार्टी ने उन्हें पार्षद प्रत्याशी बनाया है और उनका पूरा फोकस वार्ड की जनता और विकास कार्यों पर है। मेयर कौन बनेगा, इसका फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। जनसंपर्क में टूटी सड़क, गंदा पानी और आवारा पशु बने मुद्दा नीरज अग्रवाल ने कहा कि जनसंपर्क के दौरान क्षेत्र में कई गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। सफाई व्यवस्था, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और बदहाल सड़कें लोगों की रोजमर्रा की परेशानी बनी हुई हैं। उन्होंने आवारा पशुओं की समस्या को भी बड़ा मुद्दा बताया। नीरज ने दावा किया कि जनसंपर्क के दौरान एक निराश्रित गाय की चपेट में आने से उनके एक कार्यकर्ता का पैर टूट गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके अलावा क्षेत्र में गंदे पानी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। नीरज ने कहा कि इन समस्याओं का समाधान करना उनकी प्राथमिकता होगी। कांग्रेस का हमला- पैराशूट उम्मीदवार भेज दिया, अपनी पार्टी में भी विरोध कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश विजय ने बीजेपी प्रत्याशी नीरज अग्रवाल को बाहरी बताते हुए हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह खुद इसी क्षेत्र के निवासी हैं और लंबे समय से जनता के बीच रहकर काम कर रहे हैं। मुकेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने दूसरे क्षेत्र से प्रत्याशी को लाकर वार्ड-121 में उतार दिया है। बीजेपी का प्रत्याशी पैराशूट उम्मीदवार है। मुकेश ने यह भी दावा किया कि बीजेपी प्रत्याशी का विरोध उनकी अपनी पार्टी में हो रहा है और पार्टी के कई लोग उन्हें पसंद नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि बीजेपी के भीतर हालात सामान्य नहीं हैं। मुकेश विजय ने कहा कि वह साल के 365 दिन जनता के बीच रहते हैं और आगे भी जनता के साथ खड़े रहेंगे। क्षेत्र में कांग्रेस का विधायक होने का फायदा भी वह विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पार्षद के कार्यकाल के बावजूद आज भी क्षेत्र में सड़क, सीवरेज और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं बनी हुई हैं। जगह-जगह गड्ढे हैं और आवारा पशु लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। मुकेश का कहना है कि पार्षद बनने के बाद इन समस्याओं का समाधान उनकी पहली प्राथमिकता होगी और कांग्रेस विधायक के साथ मिलकर वार्ड को शहर का आदर्श वार्ड बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। 3500 वैश्य वोटों पर तीनों की नजर वार्ड नंबर 121 में करीब 9200 मतदाता हैं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 3500 वोट वैश्य समुदाय के बताए जा रहे हैं। इसके बाद करीब ढाई हजार वोट सिंधी और पंजाबी समुदाय के हैं। वहीं एससी-एसटी और ब्राह्मण समुदाय के मतदाता भी चुनावी गणित में अहम भूमिका निभाएंगे। सबसे बड़ा राजनीतिक ट्विस्ट यही है कि बीजेपी के नीरज अग्रवाल, कांग्रेस के मुकेश विजय और निर्दलीय महेश ठाकुरिया, तीनों वैश्य समुदाय से आते हैं। ऐसे में वैश्य वोट अगर एक तरफ नहीं गए तो इसका सीधा फायदा किसे होगा, यह कहना मुश्किल है। बीजेपी के लिए महेश ठाकुरिया की बगावत चुनौती बन सकती है, जबकि कांग्रेस स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे पर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में वार्ड-121 में लड़ाई अब बीजेपी बनाम कांग्रेस से आगे निकलकर टिकट, बगावत, भीतरघात और वोट बैंक की जंग बन गई है। चुनावी मैदान में मौसेरे भाई आमने-सामने वार्ड नंबर 122 में चुनावी मुकाबले ने रिश्तों को भी राजनीतिक रंग दे दिया है। बीजेपी ने निवर्तमान पार्षद घनश्याम चंदलानी को फिर से टिकट दिया है। कांग्रेस ने उनके मौसेरे भाई राजकुमार संगतानी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में अब दोनों मौसेरे भाई एक-दूसरे के सामने चुनावी मैदान में हैं। करीब 10,600 मतदाताओं वाले इस वार्ड में सिंधी और पंजाबी समुदाय के करीब 7 हजार वोट हैं। इसके अलावा करीब 3500 वोट वैश्य और ब्राह्मण समुदाय से जुड़े हैं। दोनों प्रमुख पार्टियों ने सिंधी समुदाय से ही उम्मीदवार उतारकर सबसे बड़े वोट बैंक पर सीधा दांव खेला है। ऐसे में यहां मुकाबला सीधा बीजेपी और कांग्रेस के बीच है, लेकिन चुनावी लड़ाई को खास बनाने वाली बात दोनों प्रत्याशियों की रिश्तेदारी है। राजकुमार का अपने ही मौसेरे भाई पर हमला- 5 साल में नहीं हुआ काम कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार संगतानी ने निवर्तमान पार्षद और अपने मौसेरे भाई घनश्याम चंदलानी के पांच साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। राजकुमार ने आरोप लगाया कि पिछले पांच साल में क्षेत्र में कोई ऐसा काम नहीं हुआ, जिससे जनता की मूलभूत समस्याएं खत्म हो सकें। आज भी लोग बदहाल सफाई व्यवस्था, टूटी सड़कों और बंद स्ट्रीट लाइटों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि आवारा पशु क्षेत्र की बड़ी समस्या बन चुके हैं और आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजकुमार ने यह भी कहा कि वार्ड में नियमों के विपरीत फ्लैट कल्चर तेजी से विकसित हुआ है, जिससे सीवरेज व्यवस्था पर दबाव बढ़ा और समस्या गंभीर होती गई। उन्होंने कहा कि पार्षद बनने के बाद सफाई, सड़क, सीवरेज और आवारा पशुओं की समस्या का समाधान उनकी पहली प्राथमिकता होगी। राजकुमार ने पूरे वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी वादा किया। उनका कहना है कि जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दावा- सर्वे में 90% लोग खिलाफ, अपनी पार्टी में भी नाराजगी अपने मौसेरे भाई के खिलाफ चुनाव लड़ने के सवाल पर राजकुमार संगतानी ने खुलकर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पांच साल में घनश्याम चंदलानी क्षेत्र में काम नहीं कर पाए और जनता परेशान है। राजकुमार ने दावा किया कि क्षेत्र में कराए गए सर्वे में 90 प्रतिशत लोग निवर्तमान पार्षद के खिलाफ सामने आए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि हालात ऐसे हैं कि बीजेपी के अपने लोग भी घनश्याम से नाराज हैं। बीजेपी सरकार होने के बावजूद कांग्रेस का पार्षद जीतने के बाद कैसे काम करेगा, इस सवाल पर राजकुमार ने कहा कि वह सिर्फ जनता के लिए काम करने के इरादे से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह 24 घंटे और सातों दिन जनता के बीच रहते हैं। कांग्रेस ने भी उन्हें इसी वजह से उम्मीदवार बनाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में कांग्रेस का विधायक है और विधायक फंड के जरिए विकास कार्यों के लिए राशि लाने का प्रयास किया जाएगा। राजकुमार ने कहा कि उनका लक्ष्य वार्ड से बीजेपी के कुशासन को खत्म करना और जनता की समस्याओं का समाधान करना है। घनश्याम का पलटवार- आरोपों का जवाब मेरा काम और जनता देगी बीजेपी प्रत्याशी और निवर्तमान पार्षद घनश्याम चंदलानी ने एंटी – इनकंबेंसी के सवाल को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में क्षेत्र के लिए काफी काम किया गया है। सड़क, सीवरेज और सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए विकास कार्य कराए गए। घनश्याम ने कहा कि क्षेत्र में अभी भी कई काम होने बाकी हैं और इन्हें पूरा करना उनकी अगली प्राथमिकता होगी। अपने मौसेरे भाई और कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार संगतानी द्वारा लगाए गए आरोपों पर घनश्याम ने ज्यादा प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि झूठे और बेबुनियाद आरोपों का जवाब वह नहीं देंगे। उन्होंने दावा किया कि मतदान के दिन जनता उनके पांच साल के काम के आधार पर फैसला करेगी। घनश्याम का कहना है कि उन्हें सिर्फ उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास है कि जनता उनके काम पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर उन्हें मौका देगी। 122 में एंटी-इनकंबेंसी बनाम अनुभव, नया चेहरा बनाम पुराना काम वार्ड नंबर 122 में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एंटी-इनकंबेंसी और पार्टी के भीतर संभावित नाराजगी है। कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार संगतानी इसी मुद्दे को लगातार हवा दे रहे हैं। दूसरी तरफ घनश्याम चंदलानी अपने पांच साल के काम को सबसे बड़ा हथियार बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के सामने भी चुनौती कम नहीं है। राजकुमार नया चेहरा हैं और उन्हें बीजेपी के मजबूत संगठन के साथ-साथ निवर्तमान पार्षद के अनुभव का सामना करना है। सबसे बड़ा दांव करीब 7 हजार सिंधी और पंजाबी वोटों पर है। दोनों प्रत्याशी सिंधी समुदाय से हैं, इसलिए यहां समुदाय के भीतर वोटों का झुकाव चुनाव परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। आदर्श नगर के दो वार्डों में रोचक मुकाबला वार्ड नंबर 121 में सवाल यह है कि बीजेपी का बागी महेश ठाकुरिया कितने वोट काटेंगे और इसका फायदा कांग्रेस को होगा या बीजेपी अपने संगठन के दम पर वोटों का बंटवारा रोक पाएगी। नीरज अग्रवाल के सामने बाहरी होने के आरोप हैं, जबकि वह खुद को पहले से क्षेत्र से जुड़ा और जनता के बीच सक्रिय बता रहे हैं। कांग्रेस के मुकेश विजय स्थानीय होने और जनता के बीच लगातार मौजूद रहने का दावा कर रहे हैं। वहीं वार्ड नंबर 122 में मुकाबला बिल्कुल अलग है। यहां बगावत से ज्यादा चर्चा रिश्तेदारी और पांच साल के काम की हो रही है। एक तरफ निवर्तमान पार्षद घनश्याम चंदलानी हैं, जो अपने काम के आधार पर दोबारा वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ उनके मौसेरे भाई राजकुमार संगतानी हैं, जो उसी पांच साल के कार्यकाल को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर मैदान में उतरे हैं। कुल मिलाकर आदर्श नगर के इन दोनों वार्डों में चुनावी मुकाबला अब काफी रोचक हो गया है। वार्ड-121 में एक टिकट ने बीजेपी के यू भीतर बगावत खड़ी कर दी है और एक ही समाज के तीन उम्मीदवार आमने-सामने हैं। वहीं वार्ड-122 में मौसेरे भाई रिश्तेदारी भूलकर एक-दूसरे के खिलाफ वोट मांग रहे हैं।
